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निराशा के परिवेश में आशा की किरण है पत्रकारिता

Mon, 07 May 2012 12:00 PM IST
Ballia
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बलिया। पूर्व सांसद एवं वरिष्ठ पत्रकार राजनाथ सिंह ‘सूर्य’ ने कहा कि जब कहीं से प्रकाश न मिले तो अपने अंदर के दीपक से प्रकाशित होना चाहिए। आजादी के बाद मिशन से प्रोफेशन बनी पत्रकारिता अब मार्केंटिग हो चुकी है। अधिक विज्ञापन देने वाले को ब्यूरोचीफ बनाया जाता है।
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श्री सिंह रविवार को नगर के टाउन हाल में आद्य पत्रकार देवर्षि नारद जयंती समारोह एवं विचार गोष्ठी में ‘पत्रकारिता, अतीत व वर्तमान’ विषय पर बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रलोभन और अहंकार के परित्याग और स्वाभिमान पूर्वक लोकहित के लिए की जाने वाली पत्रकारिता ही निराशा के परिवेश में आम जनमानस के लिए आशा की किरण है। कहा कि जो देश पूर्वजों के प्रति आस्था नहीं रखता है वह मिट जाता है। ऐसा कई इस्लाम और ईसाई देशों के साथ हुआ है। भारत की आस्था आज भी मजबूत है। इसलिए यह छोटा हुआ पर मिटा नहीं है। मार्क्सवाद में भोग की प्रवृति थी। इसीलिए वह खत्म हो गया। पश्चिमी देशों में भी भोग की प्रवृत्ति है। ऐसे में अब उनकी स्थिति चरम पर पहुंचकर नीचे आने लगी है। शीघ्र ही उनका विनाश होगा। उन्होंने अंग्रेजी पर प्रहार करते हुए कहा कि 15 अगस्त 1947 के बाद से लोग अपनी चीजों का आग्रह छोड़ते जा रहे है, जो बहुत ही गलत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश के शीर्ष 10 अखबारों में एक भी अंग्रेजी नहीं है। नारद पर कई कहानियों का जिक्र करते हुए पत्रकारों से कहा कि नारद का अनुसरण करना है तो दुष्टों का विनाश करें। विशिष्ट अतिथि केपी श्रीवास्तव ने कहा कि पत्रकार भूत भविष्य वर्तमान का समन्वय करता है और वह त्रिकालदर्शी है। इसके पूर्व मुख्य अतिथि ने समारोह की शुरुआत देवर्षि नारद के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्वलित कर किया। इस मौके जर्नादन राय, डा. भरत पांडेय, पूर्व विधायक श्रीभगवान पाठक, प्रवक्ता रामेश्वर सिंह, रंगकर्मी विवेकानंद सिंह, संजय शुक्ल, बैरिस्टर जी, डा. राजीव कुमार, डा. विनोद सिंह, राघवेंद्र सिंह, मोतीचंद, अक्षय ठाकुर, मणिराम मिश्र, केके पाठक, रणविजय, अखिलेश, उमेश, साहित्यकार शिवकुमार सिंह कौशिकेय, भाजपा नेता संजय मिश्रा आदि मौजूद रहे। स्वागत अरुण मणि, आभार व ज्ञापन गिरीश नारायण चतुर्वेदी ने किया। अध्यक्षता डा. अनिल कुमार उपाध्याय व संचालन रामजी सिंह ने किया।
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