बलिया। युनाइटेड फोरम आफ बैंक यूनियंस के आह्वान पर जनपद के सभी सरकारी बैंकों के कर्मचारी मांगों के समर्थन में बुधवार को काम नहीं किए। बैंकों पर ताला लटका रहा। अग्रणी बैंक के जिला प्रबंधक के मुताबिक करीब 40 से 50 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित रहा है। उधर जिन लोगों को बैंकों की बंदी के बारे में पता नहीं था, वे सुबह बैंकों के गेटों के बाहर भटकते रहे। जानकारी होने पर लौट गए।
युनाइटेड फोरम आफ बैंक यूनियंस के आह्वान पर मंगलवार से ही सरकारी बैंकों के कर्मचारियों का प्रदर्शन शुरू है। संगठन के आह्वान पर तीन दिसंबर यानी बुधवार को कर्मचारियों ने बैंकों में तालाबंदी कर एक जगह प्रदर्शन किया। बता दें कि मांगों के समर्थन में दो से पांच दिसंबर तक चलने वाले धरना-प्रदर्शन के दूसरे दिन आंचलिक हड़तालों के क्रम में उत्तर क्षेत्र के राज्यों में एक दिवसीय हड़ताल का आह्वान किया गया था। साथ ही जनपद के सभी बैंकों की शाखाओं में पूर्ण तालाबंदी रही।
सेंट्रल बैंक की मुख्य शाखा के गेट पर तालाबंदी क र प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों को संबोधित करते फोरम के संयोजक केएन उपाध्याय ने कहा कि प्रबंधतंत्र जिस प्रकार से वर्तमान संघर्ष को नजरअंदाज कर रहा है। भविष्य में इसके बड़े खतरनाक परिणाम हो सकते है। कहा कि अभी तक यूनियन संयमित तरीके से अपना संघर्ष एक दिवसीय हड़ताल के रूप में कर रहा है। अभी भी अगर प्रबंधतंत्र की आंखें नहीं खुलीं तो आने वाले समय में अनिश्चित कालीन हड़ताल के लिए बाध्य होंगे। प्रबंधतंत्र की ओर से बैंकों की खराब हालत का हवाला देकर वेतन बढ़ोत्तरी में देरी करना महंगा पड़ेगा। बैंकों की खराब हालत के लिए प्रबंधतंत्र ही जिम्मेदार है। क्योंकि अरबों रुपये इस देश के बड़े घरानों के पास ही बकाया है, जिसे वसूल करने के प्रति सरकार गंभीर नहीं है। इस मौके पर प्रशांत कुमार उपाध्याय, मिथिलेश कुमार, दिवाकर दूबे, जवाहर लाल पाठक, एमए खान, राकेश अग्रवाल, रविंद्र सिंह, श्याम बिहारी, एसके सिंह, शिवशंकर तिवारी, गंगा, सुभाष, यमुना, मनीष, प्रमोद कुमार सिंह, सुधीर पांडेय, कन्हैया, विनोद, जनार्दन आदि लोग उपस्थित रहे।
अग्रणी बैंक के जिला अग्रणी प्रबंधक एके सिन्हा ने बताया कि बैंकों के हड़ताल से करीब 40-50 लाख रुपये के लेन-देन प्रभावित हुए है। एटीएम में धन पड़े रहने से लोगों को थोड़ी सी राहत हुई है।