बलिया। गंगा और घाघरा का जलस्तर बढ़ने लगा है। इससे तटवर्ती गांवों में दहशत का माहौल है। बैरिया, सदर तहसील के कई गांवों के लोग अपना आशियाना उजाड़कर जरूरी सामान के साथ सुरक्षित स्थानों पर निकल गए हैं। अब तो कटान पीड़ितों की शरण स्थली टीएस बंधा और एनएच-31 पर भी जगह नहीं बचा है। आबादी की ओर बढ़ रहीं नदियां लोगों के घरों को आगोश में लेने लगी हैं तो किसानों की भूमि भी कटकर समाने लगी है।
गंगा के तटवर्ती गांव जहां कटान से लोग दहशत में जी रहे हैं। इन गांवों में बैरिया तहसील क्षेत्र के श्रीनगर, केहरपुर, सुघर छपरा आदि गांव हैं। जबकि सदर तहसील में चौबे छपरा, गंगापुर सहित अन्य गांवों में भी कटान तेजी से हो रहा है। इन गांवों में आबादी की ओर गंगा बढ़ रही है। तटवर्ती लोग भयभीत हैं। लोग भयवश अपना आशियाना उजाड़ रहे हैं। दर्जनों परिवार के लोग अब तक पलायन कर राष्ट्रीय राजमार्ग-31 पर शरण लिए हैं। कटान पीड़ित अपने पशु और परिवार के लोगों को साथ लेकर अन्यत्र जा रहे हैं। पशुओं के लिए चारे की समस्या विकट होती जा रही है। आलम यह है कि कटान से आबादी की भूमि के साथ ही सब्जी और खेत दोनों ही तबाह हो रहे हैं।
घाघरा के जलस्तर में वृद्धि और कटान से उपजाऊ भूमि कट-कट कर विलीन हो रही है। चैनपुर, गुलौरा, मठिया और महुआ तर के शिव मंदिर के पास जबरदस्त कटान से तटवर्ती सहमे हैं। टगुनियां गांव में रिहायशी क्षेत्र से 100 मीटर की दूरी पर नदी का कटान हो रहा है। कटान के रोकथाम की स्थाई व्यवस्था न होने से तटवर्ती गांवों के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है। घाघरा नदी से बेल्थरारोड से लेकर रेवती तक कटान जारी है। रेवती इलाके के दर्जनों गांव कटान के मुहाने पर हैं। यहां से लोग पलायन कर टीएस बंधे पर शरण लिए हैं। पिछले एक दशक से यह सिलसिला जारी है। इन कटान और बाढ़ पीड़ितों को हर बार आशियाना देने तथा आर्थिक सहायता का आश्वासन दिया जाता है, लेकिन अभी तक यह इस उम्मीद में टकटकी लगाए हैं।