गड़वार। शहीद भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु के शहादत दिवस को लेकर कस्बा स्थित रामलीला मैदान के प्रांगण में कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। इसमें कवियों, कवियत्रियों ने अपनी रचनाएं सुनाईं। भ्रूण हत्या पर दयाशंकर प्रेमी की लाइन ‘लइकिन के अइसे हत्या होत रही त, लइका के सिर पर मउर ना चढ़ी’ कविता ने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत कवियत्री माधुरी सिंह मधुर ने सरस्वती वंदना से की। उसके बाद बृजमोहन प्रसाद अनाड़ी ने शहीदाें को नमन करते हुए क्रांति के सपूत माता भारती के अग्रदूत, दिल मजबूत रण बापू का सहाए हैं, की प्रस्तुति कर जोश भरा। गोवर्धन भोजपुरी ने गमों में डूब गया आलम, चांद, सूरज व तारे भी रोने लगे, रमाधार त्रिपाठी व्याकुल ने गंध बनकर बिखर जाइए, दिल में सबसे उतर जाइए, सुनाया। कवियत्री डा. प्रतिभा सिंह ने जिसका कोई हम सफर चाहिए, तेरे जैसा रह गुजर चाहिए, सुनाया। इसके पहले कार्यक्रम की शुरुआत शुभारंभ मुख्य अतिथि सिविल बार एसोसिएशन बलिया के अध्यक्ष अशोक ओझा व विशिष्ठ अतिथि गड़वार प्रधान सुधा देवी ने फीता काटकर किया। इस मौके पर व्यवस्थापक बब्बन सिंह, नियाज खां ने आभार जताया। अध्यक्षता तारकेश्वर मिश्र राही व संचालन डा. ईश्वर चंद्र त्रिपाठी ने किया।