बलिया। ऋषि-मुनियों की तपोस्थली पर सदियों से लगते आ रहे नंदीग्राम पशु मेला में इस बार भी पहले दिन से ही रौनक है। आठ नवंबर से शुरू मेला तीसरे ही दिन शनिवार को देखने लायक रहा। मेले में गाय, बैल की खेप उस पैमाने में नहीं आई है, लेकिन घोड़ों की संख्या ने मेला को गुलजार कर दिया है। मेले के दूसरे ही दिन कुल आय पिछले वर्ष की धनराशि की अपेक्षा में 34,710 रुपये अधिक हुई। जबकि शनिवार को दोपहर 12 बजे तक नगर पालिका की कुल आय 90,300 है। लेकिन इससे इतर मेले को गुलजार करने वाले पशु व्यापारी तथा पशुओं के प्रति नगर पालिका एकदम से उदासीन है। पूरे मेला परिसर में धूल उड़ रही है, लेकिन अभी तक समुचित पानी की व्यवस्था नहीं की गई है, जिसको लेकर पशु व्यापारियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
नंदीग्राम पशु मेले में शनिवार को मेला परिसर में दिनभर पशुओं के आने का क्रम जारी था। पड़ोस के जनपद गाजीपुर से घुड़सवारों का जहां आने का क्रम जारी है। वहीं राजस्थान, आरा, हरियाणा से भी व्यापारी घोड़ा लेकर पहुंच रहे हैं। जबकि मेले के अंतिम छोर में बड़ी खेप में बैल तथा गाय और बछड़ों का भी आना शुरू हो गया है। व्यापारी को अपनी-अपनी जमीन पाने के बाद उसमें दिनभर टेंट, बांस, बल्ली लगाने में मशगूल दिखे तो कुछेक गोलबंद होकर सतुआ-प्याज खाने में जुटे रहे। आरा जिले से आए पशु व्यापारी जितेंद्र की मानें तो मेला परिसर में हम लोगों को जगह की कमी नहीं हो रही है। लेकिन पानी की बहुत ही परेशानी है। पलाऊ जमीन होने के कारण रहने में परेशानी हो रही है। वहीं गाजीपुर के करीमुद्दीनपुर से आए पशु व्यापारी आरिफ ने बताया कि यहां का नगर पालिका प्रशासन मेले को लेकर केवल कोरम करता है। प्लाऊ जमीन पर कैसे हम लोग टेंट लगाएं और रहने के अनुकूल बनाएं समझ में नहीं आ रहा है। पानी की जरूरत पड़ रही है तो पूर्वी छोर पर जाना पड़ रहा है। आलम यह है कि जमीन अभी भी उबड़खाबड़ है। पशुपालकों ने बताया कि जहां उन्हें रहने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है वहीं पशुओं को बैठने में परेशानी हो रही है।
बेटा से भी आगे निकला मेरा बेजुबान ‘मोती’
बलिया। ‘मोती’ यह नाम है बखोरूपुर निवासी सिद्धनाथ शाह के घोड़े का। मेले में आए लोगों का बरबर ही वह ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। मालिक के इशारे पर बैठने से लेकर पानी के पात्र तक लेकर आता है। बिहार आरा के सिद्धनाथ शाह का कहना है कि एक साल का मोती उनके घोड़ा नहीं बल्कि उसके बेटे से भी आगे है...।
सिद्धनाथ बताते हैं कि एक साल से सिद्धनाथ उसके पास है और बेटे के रूप में सिद्धनाथ ने मोती का छठिहार भी किया था, जिसमें दूरदराज के पशु व्यापारी दावत खाने भी आए थे। कहा कि एक बार मैं बीमार पड़ गया, गांव में मानिक डाक्टर के यहां मोती खुद पहुंचकर डाक्टर को बुलाकर अपने घर पर लाया था। तभी से सिद्धनाथ की नजर में मोती उसके बेटे से भी आगे निकल गया। मैं अपनी मोती के लिए रानी भी ढूंढ लिया हूं और रानी भी नंदीग्राम पशुमेले में मौजूद थी। मेले में घोड़े-घोड़ी इस जोड़ी को देखने के लिए आम जनता के साथ-साथ दूर दराज से आए पशु व्यापारी भी खूब निखार रहे थे।