बलिया। वाराणसी-छपरा रेलखंड के बलिया रेलवे स्टेशन पर सोमवार की रात उस समय अफरा तफरी मच गई जब छपरा-लखनऊ एक्सप्रेस के चालक ने गाड़ी लेकर जाने से मना कर दिया। वह आरपीएफ सिपाही पर दुर्व्यवहार का आरोप लगा रहा था, जिसकी सूचना मिलने पर स्टेशन अधीक्षक और आरपीएफ प्रभारी मौके पर पहुंचे तथा समझाने का प्रयास किए, लेकिन वह अपनी जिद पर अड़ा रहा। जिसके बाद स्टेशन अधीक्षक ने छपरा से दूसरे चालक को बुलाया और ट्रेन को रवाना किया। इस दौरान कई ट्रेनें भी प्रभावित हुई। रेलवे चिकित्सालय में चिकित्सक के नहीं होने के कारण चालक का मेडिकल मुआयना नहीं हो सका। इस मामले में चालक ने स्टेशन अधीक्षक को पत्रक सौंप आरोपी पुलिस के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।
छपरा-लखनऊ एक्सप्रेस के लोको पायलट योगेेंद्र सिंह ने बताया कि मंगलवार की रात करीब नौ बजे ट्रेन बलिया स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर-एक पर पहुंची। जहां इंजन से उतरने के बाद स्टेशन के बाउंड्री वाल के बाहर लघुशंका करने गया। इस दौरान वहां एक व्यक्ति पहुंचा और अपने आपको आरपीएफ का जवान बताते हुए मेरे साथ दुर्व्यवहार करने के साथ ही गाली-गलौज करने लगा। मैंने बताया कि छपरा-लखनऊ एक्सप्रेस का लोको पायलट हूं। लेकिन उसने मेरी एक न सुनी। बल्कि आरपीएफ लाकअप में बंद कर दिया। यह देख सहायक लोको पायलट ट्रेन से उतर आरपीएफ कार्यालय पहुंचा और मेरे बारे में बताया। बावजूद उसने एक न सुनी। अंत में सहायक लोको पायलट ने ट्रेन को बंद कर स्टेशन मास्टर को घटना से अवगत कराया। सूचना पर पहुंचे स्टेशन अधीक्षक संजय सिंह और आरपीएफ प्रभारी अमित कुमार राय ने चालक को समझाने का प्रयास किया, लेकिन वह नहीं माना। इस पर स्टेशन अधीक्षक ने छपरा से लोको पायलट को बुलाकर ट्रेन को रवाना किया। इस दौरान गाड़ी करीब एक घंटा 40 मिनट तक बलिया रेलवे स्टेशन पर खड़ी रही। रात करीब 11 बजे ट्रेन बलिया स्टेशन से रवाना हुई।
तीन ट्रेनें रही प्रभावित
बलिया। अप लखनऊ-छपरा एक्सप्रेस के स्टेशन पर करीब डेढ़ घंटे तक खड़ा होने के कारण डाउन पवन एक्सप्रेस सागरपाली स्टेशन पर लगभग दो घंटे खड़ी रही। वहीं अप साबरमती एक्सप्रेस 30 मिनट तक बांसडीह रोड एवं स्वतंत्रता सेनानी सुपर फास्ट एक्सप्रेस 30 मिनट प्लेटफार्म नंबर दो पर खड़ी रही।
चिकित्सक के अभाव में नहीं हो सकी जांच
बलिया। रेलवे अस्पताल में चिकित्सक नहीं होने के कारण चालक योगेंद्र सिंह के ब्लड की जांच नहीं हो सकी। रेलवे विभाग के नियमानुसार चालक की ब्लड की जांच होना आवश्यक है।
थाने की दीवार कर रहा था लघुशंका
बलिया। आरपीएफ प्रभारी अमित राय ने बताया कि चालक आरपीएफ थाने के दीवार पर लघुशंका कर रहा था। जिसे साफ-सफाई को ध्यान में रखते हुए सिपाही ने पकड़ा था। जब पता चला कि वह लोको पायलट है तो उसे छोड़ दिया गया। बताया कि सिपाही द्वारा मना किया गया तो वह सिपाही से अभद्रता करने लगा और ट्रेन ले जाने से मना कर दिया।