मनियर। नवका गांव-ककरघटा मार्ग बुधवार को घाघरा की तेज धार में विलीन हो गया। इसके बाद कटान का रुख अब गांव की ओर बढ़ रहा है, जिससे ग्रामीण अपने-अपने घरों को छोड़कर सुरक्षित स्थान की ओर पलायन करने लगे हैं। सूचना पर पहुंचे जिलाधिकारी सुरेंद्र विक्रम ने मातहतों को कैंप लगाकर ग्रामीणों को सुविधा मुहैया कराने का आदेश दिया। वहीं, सलेमपुर सांसद रविंद्र कुशवाहा भी बुधवार को ककरघट्टा गांव पहुंचे तथा कटान का जायजा लेने के बाद जिलाधिकारी से राहत कार्य में तेजी लाने को कहा।
बताया जाता है कि ककरघट्टा गांव में घाघरा के कटान को राकने के लिए प्रशासन के लाख प्रयास व बाढ़ विभाग के अधिकारियों द्वारा पांच दिन में लाखों रुपए खर्च कर दिया गया, जिसके वावजूद भी सड़क को नहीं बचाया जा सका। सड़क ध्वस्त होने के बाद घाघरा का कटान गांव की तरफ हो गया है। जिसे दहशतजदा ग्रामीण अपना-अपना सामान समेट कर सुरक्षित स्थान की तरफ पलायन करने लगे हैं। उधर, मौके पर पहुंचे जिलाधिकारी ने अन्य प्रशासनिक अमले और एनडीआरएफ व एसडीआरएफ की टीम को बुलाकर बचाव कार्य में लगाया गया। डीएम ने दूरभाष से बिजली विभाग के अधिकारियों को कटान के समीप लगे पोल व तार को तुरंत हटाने का निर्देश दिया। वही उप जिलाधिकारी बाँसडीह अनिल चतुर्वेदी को गांव बचाने के लिए पेड़ की डाल काट कर कटान के जगह धारा में डालने का निर्देश दिया। कटान पीड़ितों को कोई असुविधा न हो इसके लिए भी खाद्यान अन्य सामग्री वितरण करने के साथ ही पका पकाया भोजन वितरण करने आदेश दिया।
इस मौके पर अपर जिलाधिकारी मनोज सिंघल, बाढ विभाग के अधिशासी अभियंता अजय कुमार, सहायक अभियंता डीके चतुर्वेदी, क्षेत्राधिकारी बाँसडीह अशोक कुमार सिंह सहित अन्य प्रशासनिक लोग मौजूद रहे। उधर, ककरघट्टा के ग्रामीणों का कहना है कि 15 दिन पहले बाढ़ एवं कटान की आशंका जताई गई थी। लेकिन अधिकारियों ने गंभीरता नहीं दिखाई। ग्रामीणों का कहना है कि यदि बांस का चोंगा बनाकर बोरी में मिट्टी डालकर यदि कार्य किया गया होता तो ऐसी नौबत नहीं आती।
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डीएम को पकड़ रो पडी महिला
मनियर। जिलाधिकारी के सामने ही गांव की 45 वर्षीय महिला देवांती देवी ने डीएम की बाह पकड़ फफक कर रो पड़ी। जिसपर जिलाधिकारी ने हर संभव मदद का भरोसा दिया। कहा कि संकट की घडी में धैर्य से काम ले।
घाघरा के जलस्तर में गिरावट
बेल्थरारोड । लाल निशान से ऊपर बहने वाली घाघरा नदी के जलस्तर में गिरावट का सिलसिला जारी है। इससे बाढ़ की संभावना फिलहाल टल गई है। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार बुधवार को अपराह्न में जलस्तर 64.620 मीटर दर्ज किया गया। जो लाल निशान से 61 सेंटीमीटर अधिक है।आयोग का कहना है कि एक-एक सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से जल स्तर में कमी हो रही है। आयोग की माने तो अगले 24 घंटे में जलस्तर में गिरावट की संभावना है। जलस्तर में कमी के साथ ही तटवर्ती क्षेत्रों में तटवर्ती भूमि कट-कटकर नदी में विलीन हो रही है। कटान की मुख्य वजह यह है कि गत वर्षो देवरिया जिले के बरहज में कटान रोकने के लिए बने ठोकर से टकराने के बाद नदी की जलधारा सीधे मुड़कर बलिया जिले के तटवर्ती भागों में पहुंचती है ।जिससे कटान की स्थिति उत्पन्न हो रही है। हालात से वाकिफ होने के बावजूद प्रशासन ठोकर का निर्माण कर कटान रोकने की स्थाई व्यवस्था नहीं कर सका। इसको लेकर लोगों में नाराजगी है।