बलिया। जिले में संचालित तीन हजार से अधिक बीएसएनएल की ब्रॉडबैंड सेवा भगवान भरोसे ही चल रही है। किसी तरह की गड़बड़ी होने पर विभाग के पास इसे दुरुस्त करने का कोई इंतजाम नहीं है। महीनों पहले विभाग की ओर से दी गई इसकी फ्रेंचाइजी समाप्त हो चुकी है और अभी तक कोई वैकल्पिक व्यवस्था तक नहीं हो सकी है। जिलेभर में जहां बीएसएनएल की ब्रॉडबैंड सेवा भगवान भरोसे है वहीं मोबाइल सेवा भी लड़खड़ाती ही चल रही है। हैरानी की बात है कि विभाग के जिम्मेदार का मोबाइल बंद रहता है तो अन्य अधिकारी कुछ भी बताने से कतराते हैं।
एक ओर भारत सरकार डिजिटल इंडिया, न्यू इंडिया, ऑनलाइन सेवा, ई-पेमेंट आदि को बढ़ावा देने की बात कर रही है तो दूसरी ओर बीएसएनएल की सेवा दिनों-दिन बदहाल होती जा रही है। बीएसएनएल की ओर से ग्राहकों को जोड़ने के लिए जहां आकर्षक योजनाएं प्रस्तुत की जा रही हैं वहीं जिले बीएसएनएल की सेवा महीनों से पूरी तरह ध्वस्त है। आलम यह है कि किसी भी समस्या के समाधान में अधिकारियों की ओर से टरकाऊ रास्ता अपनाया जाता है और एक-दूसरे पर जिम्मेदारी देकर पल्ला झाड़ लिया जाता है। हैरानी की बात है कि संचार राज्यमंत्री के पड़ोसी जिले में ही बीएसएनएल की यह दुर्दशा है। बताया जाता है कि विभाग की ओर से ब्राडबैंड सेवा के संचालन के लिए बतौर फ्रेंचाइजी प्राइवेट संस्थाओं को दी गई थी जिसका करार महीनों पहले ही समाप्त हो चुका है। आलम यह है कि जिले में तीन हजार से अधिक ब्रॉडबैंड कनेक्शन हैं, और अब किसी गड़बड़ी की शिकायत पर विभाग हाथ खड़ा कर देता है। इसके चलते लोगों को अन्य कंपनियों की सेवा लेना पड़ता है।
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ब्रॉडबैंड सेवा संचालन को लेकर चयनित कार्यदायी संस्था का करार समाप्त हो चुका है। नए सिरे से विभाग की ओर से टेंडर अभी नहीं हो सका है। ब्रॉडबैंड से संबधित किसी गड़बड़ी को ठीक करने के लिए विभाग के पास कोई व्यवस्था नहीं है।
- दिनेश कुमार, एसडीओ, टेलीफोन्स, बलिया