बलिया। जिले में आवास योजनाएं अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए पूरी तरह चारागाह बन गई हैं। सूची से पात्रों के नाम हटाने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपनाए जाते हैं। मनमानी तरीके से आवासों का आवंटन भी किया जाता है। शिकायतों के बावजूद अधिकारियों की चुप्पी से कई सवाल खड़े होते हैं।
वर्ष 2016-17 में भारत सरकार की ओर से इंदिरा आवास योजना के स्थान पर प्रधानमंत्री आवास योजना संचालित की गई। इसके लिए फुलप्रूफ व्यवस्था भी बनाई गई, ताकि किसी अपात्र का चयन नहीं हो सके, लेकिन जिले में इस व्यवस्था को अधिकारियों और कर्मचारियों ने तार-तार कर दिया। प्रावधान किया गया कि सेक डाटा से संबंधित गांवों के लाभार्थियों की सूची संबंधित ब्लाक के बीडीओ के लॉगिन पर भेजी जाएगी। इसके बाद इस सूची का सत्यापन ग्रामसभा की खुली में कराते हुए पात्रों का चयन किया जाएगा। सूची गांव के पंचायत भवन आदि पर चस्पा की जाएगी। ताकि चयन में किसी प्रकार की गड़बड़ी होने पर लाभार्थी शिकायत कर सकें, लेकिन अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से इस व्यवस्था के विपरीत कार्य किया गया। अधिकांश गांवों में तो खुली बैठक तक नहीं कराई गई और सचिव, प्रधान, एडीओ, बीडीओ की मिलीभगत से मनमानी तरीके से लाभार्थियों का चयन कर लिया गया। इतना ही नहीं मनचाहे लाभार्थियों के चयन के लिए कर्मचारियों ने ऊपर के क्रम पर अंकित पात्रों को हटाने के लिए या तो गांव में नहीं रहते या फिर अज्ञात लिखकर खेल कर दिया। हालांकि इस तरह के सैकड़ों मामले सामने आने पर डीआरडीए के पीडी ने सभी बीडीओ को पत्र भेजकर आपत्ति जताई और इन पात्रों का सत्यापन करने को कहा लेकिन इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। सोहांव ब्लाक के भरौली के महावीर पासवान समेत कई गांवों के लाभार्थियों ने कई बार सीडीओ से शिकायत की लेकिन सभी शिकायतें ठंडे बस्ते में ही रह गईं। करीब एक पखवारा पहले अमर उजाला ने इसका खुलासा किया। इसके बाद रेवती ब्लाक के कुशहर गांव के प्रधान, सचिव, सेक्टर अधिकारी के अलावा दो बैंकों के शाखा प्रबंधक पर मुकदमा दर्ज कराने का आदेश पीडी ने दिया। यहां तो प्रधानमंत्री आवास की पहली किश्त ही लाभार्थियों के बदले फर्जी तरीके से खाता खोलवा कर आहरण कर लिया गया। यह तो महज बानगी भरी पूरे जिले में प्रधानमंत्री आवास में बडे़े पैमाने पर धांधली की गई है। सवाल उठता है कि प्रधानमंत्री आवास के चयन की सूची क्यों नहीं चस्पा की जाती? सरकार से मिली सूची को सार्वजनिक क्यों नहीं किया जाता? शिकायत के बावजूद आला अफसर क्यों चुप्प रहते हैं?
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प्रधानमंत्री आवास को लेकर पूरी तरह पारदर्शिता बरतने का निर्देश दिया गया है। जिन गांवों से गड़बड़ी की शिकायतें मिली जांच कर कार्रवाई भी की गई। अज्ञात आदि अंकन के मामले में भी बीडीओ से रिपोर्ट मांगी गई है, जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
-आरके त्रिपाठी, पीडी, डीआरडीए, बलिया