कहते हैं फिल्में भी हकीकत और कुछ अफसाना होती हैं, तभी तो दशकों पहले आया बॉलीवुड का ये सदाबहार गीत छोड़ेगें न हम तेरा साथ ओ साथी मरते दम तक आज भी लोगों के लबों पर मुस्कान ला ही देता है। गाहे-बगाहे सामने आने वाली रिश्ते की मिशाल ऐसे गानों की प्रासंगिकता को बनाए रखती है।
कुछ ऐसा ही बुधवार की रात्रि बलिया जिले के रसड़ा के मुड़ेरा गांव की राजभर बस्ती में हुआ। जहां पति की मौत से आहत पत्नी ने भी कुछ ही समय बाद दुनिया को विदा कह दिया। ग्रामीणों की मदद से परिजनों ने दोनों शवों का अंतिम संस्कार एक साथ गुरुवार को बक्सर गंगा तट पर किया। एक साथ दो अर्थियां उठती देख लोग रो पड़े। मुखाग्नि ज्येष्ठ पुत्र मुन्ना उर्फ चंचल राजभर ने दी।
गांव के राजभर बस्ती निवासी पशुपति राजभर (90) का बुधवार को रात्रि में आकस्मिक निधन हो गया। यह खबर जैसे ही उनकी पत्नी बदामी देवी को मिली कि कुछ देर बाद वो भी दुनिया से रुखसत हो गयी। पति-पत्नी के निधन की सूचना मिलते ही शोक संवेदना व्यक्त करने वालों का तांता लग गया। शोक व्यक्त करने वालों में भासपा नेता दिनेश राजभर, पूर्व प्रधान श्रीविलाश यादव, प्रधान प्रतिनिधि हरेंद्र यादव, अजीत सिंह, अभिषेक तिवारी आदि रहे।