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काला फीता बांधकर डाक्टरों ने की ड्यूटी

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बलिया। जिला अस्पताल के चिकित्सकों ने गुरुवार को काला फीता बांधकर मरीजों का उपचार किया। प्रांतीय स्वास्थ्य सेवा संवर्ग उप्र के आहवान पर राजस्थान सरकार की नीतियों का विरोध किया गया।
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राजस्थान प्रदेश के सरकारी सेवा में सेवारत चिकित्सक रेजिडेंट डॉक्टरर्स तथा निजी क्षेत्र के अधिकतर चिकित्सक राजस्थान सरकार की वादाखिलाफी, दमनकारी नीति एवं चिकित्सकों के प्रति अपराधियों जैसा व्यवहार करने के कारण आंदोलनरत हैं। गौरतलब है कि पिछले माह डॉक्टरों के आंदोलन पर राज्य सरकार एवं आंदोलनकारी चिकित्सकों के बीच हुई सहमति में सरकार ने डॉक्टरों की अधिकतर मांगों को मानने तथा पूर्व में की गई घोषणाओं के त्वरित क्त्रिस्यान्वयन का वादा किया था। जिसके उपरांत सभी आंदोलनरत डॉक्टर अपने काम पर वापस लौट आये थे। लेकिन राज्य सरकार द्वारा निश्चित तिथि तक घोषणा के अनुरूप कार्य नहीं किया गया। जिसके चलते डॉक्टरों ने एक बार फिर से 18 दिसंबर से नए आंदोलन का प्रस्ताव रखा था। लेकिन इसके पूर्व ही 15 दिसंबर से सरकार के मुलाजिमों ने डॉक्टरों को प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। जिसमें डाक्टरों को गिरफ्तार तक भी किया गया। यही नहीं प्रशासन ने चिकित्सकों को उनके घर पर नहीं मिलने की स्थिति उनके परिजनों को भी परेशान किया जा रहा है। प्रांतीय स्वास्थ्य संवर्ग ने यह भी आरोप लगाया कि डाक्टरों के परिजनों पर अपराधियों की तरह व्यवहार किया जा रहा है। इस मामले को लेकर आल इंडिया फेडरेशन आफ गर्वंमेंट डाक्टरर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने बुधवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री से मुलाकात कर अपनी व्यथा सुनाई। एसोसिएशन ने स्वास्थ्य मंत्री से मामले में हस्तक्षेप करने का आग्रह किया। इसी क्रम में बलिया के प्रांतीय चिकित्सा सेवा संवर्ग के डाक्टरों ने काला फीता बांध कर राजस्थान सरकार की नीतियों का विरोध किया। इस अवसर पर डा.मिथलेश कुमार सिंह, डॉ. रमेश कुमार, डा. संतोष चौधरी, डॉ.एके स्वर्णकार डॉ.आरएन उपाध्याय, डॉ.एके सिंह, डॉ.आरडी राम, डॉ. विनेश कुमार, डॉ अनुराग, डॉ तोषिक सिंह आदि उपस्थित रहे।
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