बलिया। जाति बदल कर आवास देने के मामले की जांच आला अफसरों के आदेश के एक सप्ताह बाद भी शुुरु नहीं हो सकी है। इस मामले में ग्राम पंचायत व ब्लाक स्तरीय अधिकारी अपने आप को फंसता देख मामले की लीपापोती में जुटे हैं।
लाख प्रयास के बावजूद प्रधानमंत्री आवास योजना में फर्जीवाड़ा रुकने का नाम नहीं ले रहा है। आवास योजना में फर्जीवाड़ा रोकने को लेकर अब तक की गई सभी कवायदें फेल साबित हो रही हैं। कुछ दिनों पहले सांसद आदर्श गांव कुशहर में फर्जीवाड़ा सामने के बाद कार्रवाई करने में तीन माह से अधिक का समय अधिकारियों को लग गया। इतना ही नहीं फर्जीवाड़ा मामले में मुकदमा दर्ज होने के डेढ़ माह बाद प्रधान की गिरफ्तारी भी तब हुई जब गांव में 25 अक्तूबर को सहकारिता व निबंधन आयुक्त व जिले के नोडल अधिकारी की चौपाल में ग्रामीणों इस बाबत शिकायत की। एक सप्ताह पहले दुबहड़ ब्लॉक के घोड़हरा गांव में जाति बदलकर प्रधानमंत्री आवास आवंटित करने का फर्जीवाड़ा सामने आया। इसका खुलासा होने पर सीडीओ की ओर से मामले जांच श्रम एवं रोजगार (मनरेगा) उपायुक्त यूके पाठक व जिला ग्राम्य विकास संस्थान के जिला प्रशिक्षण अधिकारी सुनील कुमार को दिया। लेकिन अभी तक जांच शुरु नहीं की गई। सूत्रों की मानें तो जाति बदलकर आवास आवंटित करने का काम अकेले कोई कर्मचारी नहीं कर सकता है और जांच में ग्राम पंचायत से लेकर ब्लाक स्तरीय अधिकारियों की गर्दन फंस सकती है।