नोटबंदी का एक साल पूरा होने के होने को है और जिले में डिजिटल भुगतान का रंग दिखने लगा है। जिले के 80 फीसदी व्यापारियों के यहां डिजिटल लेन-देन की व्यवस्था हो गई है और एक साल में 400 करोड़ से अधिक का भुगतान भी इस व्यवस्था के तहत किया गया है। नोटबंदी का एक साल आठ नवंबर को पूरा होगा। नोटबंदी के दौरान पुराने नोटों को जमा करने के बाद लोगों के जेब इस कदर खाली हो गए कि लोग जरूरत की चीजों को भी नहीं खरीद पाते थे। आलम यह था कि भुगतान को लेकर कई दिनों तक लोगों को बैंकों का चक्कर काटते रहे और पूरे दिन कतार में खड़ा भी होना। इसके बावजूद लोगों को आवश्यतानुसार भुगतान नहीं मिलता था। कई बैंक तो उस दौरान कैश नहीं होने के कारण बंद तक रहते थे। इसको देखते हुए भारत सरकार की ओर से डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए तरह-तरह के उपाय किए गए। अफसरों की ओर से जगह-जगह कैंप कर डिजिटल भुगतान को लेकर प्रचार-प्रसार भी किया गया। खासकर भुगतान को लेकर व्यापारियों को काफी परेशान होना पड़ा। इस दौरान व्यापारियों ने भी पीओएस मशीन लगवाने के लिए बैंकों को आवेदन किया लेकिन यह व्यवस्था भी कारगर साबित नहीं हो सकी क्योंकि बैंकों को पीओएस मशीन देने में काफी वक्त लग जाता था। जिले में करीब 80 फीसदी व्यापारियों ने डिजिटल भुगतान की व्यवस्था की। एलडीएम के अनुसार आज भी बड़ी धनराशि के भुगतान को लेकर बैंकों की ओर से काफी पड़ताल की जाती है और इसके चलते लोग चेक, इंटरनेट बैंकिंग आदि का प्रयोग करते हैं। इसके अलावा अधिकांश व्यापारियों के यहां पीओएस मशीन की व्यवस्था है जिससे ग्राहक खरीदारी के बाबत भुगतान करते हैं। डिजिटल भुगतान को लेकर लोगों को यह भी भय सताता है कि उनके कार्ड स्क्रैच होने के बाद कहीं उनका पासवर्ड भी न चोरी कर ली जाए। इसके अलावा डिजिटल भुगतान में नेटवर्क की समस्या भी आए दिन होती है इसके चलते भी लोग परेशान रहते हैं।
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डिजिटल भुगतान की सुविधा
बलिया। आपूर्ति विभाग ने जहां नगरीय क्षेत्रों के कोटेदारों को पीओएस मशीन उपलब्ध कराया वहीं कृषि विभाग ने भी उर्वरक विक्रेताओं को पीओएस मशीन से लैस कर दिया है।
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नोटबंदी के बाद डिजिटल भुगतान का चलन काफी तेजी से बढ़ा है। आज भी बैंकों में पीओएस मशीन के लिए आवेदन मिल रहे हैं। एक साल में जिले में 400 करोड़ से अधिक का डिजिटल का भुगतान किया गया है।
दिनेश कुमार सिन्हा
एलडीएम, बलिया