बलिया। मार्च के साथ ही वित्तीय वर्ष बीत गया। बावजूद इसके अधिकांश जरूरी दवाएं सीएचसी और पीएचसी पर नहीं भेजी गईं। सबसे दिलचस्प बात यह है कि स्वास्थ्य केंद्रों पर बिना डिमांड के ही थोक में ऑयरन की गोलियां भेज दी गई हैं। जबकि जिले के सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर पहले ही पर्याप्त मात्रा में आयरन की गोलियां पड़ी हुई हैं। हालांकि आयरन की गोलियां सिर्फ गर्भवती महिलाओं को ही दिया जाता है।
जनपद के विभिन्न क्षेत्रों में कुल सीएचसी और पीएचसी संचालित किए जा रहे हैं। जिसपर गरीबों को दवा आदि के खरीद पर करीब 11 करोड़ 43 लाख रुपये आए थे। बजट आने के बाद दवा खरीद के नाम पर खूब खेल किया गया। आलम यह रहा कि 11 माह में करीब तीन करोड़ 42 लाख की दवाएं खरीदारी की गई। जबकि अमर उजाला में बीते दिनों खबर प्रकाशित होने के बाद करीब दो करोड़ की दवाएं खरीदी गई। इस तरह दवाओं के टोटा का खत्म करने की कोशिश तो की गई। लेकिन जिले के अधिकांश सीएचसी और पीएचसी पर दवा के नाम पर करीब पांच लाख रुपये के आयरन की गोलियां भेज दी गई। जबकि अधिकांश केंद्रों पर अब भी जरुरी दवाओं का टोटा है। ऐसे में सीएचसी और पीएचसी पर लीवो फ्लाक्सासीन, फेक्सोफेनाडीन जैसी दवाएं नहीं मंगाई गई। पिछली सरकार के बजट में ये दवाएं मंगाई गई थी। अब सबसे दिलचस्प यह है कि आयरन की खपत प्रसूताओं को ही देकर किया जाता रहा है। दुबहर, रसड़ा, बांसडीह, मनियर, रेवती, नगरा, सोनवानी, सोनबरसा, सीयर जैसे सीएचसी और पीएचसी पर आज भी बहुत सी दवाएं नहीं मिल रही है। इस बाबत पूछे जाने पर सीएमओ डा. एसपी राय ने बताया कि डिमांड के मुताबिक ही दवाएं स्वास्थ्य केंद्रों पर भेजी गई है। जो दवाएं नहीं है उन्हें भी जल्द भेजवाया जाएगा।