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नौ साल बाद भी रोजगार सेवक अप्रशिक्षिति

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वर्ष 2007-08 में मनरेगा योजना के तहत नियुक्त रोजगार सेवकों के प्रशिक्षण पर 8.33 लाख की धनराशि खर्च की गई। फिर भी नौ साल से वह अप्रशिक्षित हैं। हालांकि काफी हो-हल्ला के बाद पांच माह पहले चार ब्लॉकों के रोजगार सेवकों को जिला प्रशिक्षण संस्थान की ओर से दो दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया।
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जनपद में वर्ष 2007-08 में मनरेगा योजना की शुरुआत हुई। इस योजना को सुचारु रुप से संचालित करने के लिए सभी 17 ब्लाक के प्रत्येक गांवों में रोजगार सेवकों की नियुक्ति संविदा पर की गई। कुल 833 रोजगार सेवकों की नियुक्ति हुई। लेकिन बीते नौ सालों में कुछ रोजगार सेवकों की मौत हो चुकी है और कईयों ने नौकरी भी छोड़ दी है। वर्तमान में कुल 687 रोजगार सेवक ही कार्यरत हैं। शासन के नियमों के मुताबिक संविदा या गैर संविदा कर्मचारी को तैनाती के बाद प्रशिक्षण देने का प्रावधान है। बताया जाता है कि नियुक्ति के समय प्रशिक्षण के लिए एक हजार की धनराशि दी जाती है। प्रशिक्षण को लेकर समय-समय रोजगार सेवकों की ओर से आवाज भी उठाई गई और अधिकारियों को अवगत कराया गया। उप्र ग्राम रोजगार सेवक पंचायत मित्र वेलफेयर एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष बब्बन चौधरी ने बताया कि वह वर्ष 2013 से लगातार अधिकारियों को पत्रक देकर रोजगार सेवकों को प्रशिक्षण देने व उन्हें अभिलेख आदि उपलब्ध कराने की मांग की जा रही। बताया कि बलिया को छोड़ कर सभी जगह प्रशिक्षण कराए गए हैं। पांच माह पहले काफी हो-हल्ला होने के बाद चार ब्लॉकों मनियर, रेवती, बांसडीह व बेरुआरबारी के 150 रोजगार सेवकों को दो दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया। सरकारी कर्मियों को प्रशिक्षण देने का कार्य जिला प्रशिक्षण संस्थान करता है और इसके लिए संबंधित विभाग की ओर से संस्थान को भुगतान करना होता है। जिला प्रशिक्षण संस्थान को न तो रोजगार सेवकों के प्रशिक्षण के लिए धनराशि मिली और न संस्थान की ओर से इन्हें प्रशिक्षण दिया। ऐसे में प्रशिक्षण के लिए निर्धारित 8.33 लाख की धनराशि पर उंगली उठ रही।

इनसेट....
रोजगार सेवकों के प्रशिक्षण के लिए शासन से धनराशि उपलब्ध कराई जाती है। रोजगार सेवकों के प्रशिक्षण के लिए शासन को पत्र भेजा गया है। कुछ माह माह पहले चार ब्लाकों के रोजगार सेवकों का प्रशिक्षण कराया गया था, धनराशि उपलब्ध होने पर शेष रोजगार सेवकों का भी प्रशिक्षण कराया जाएगा।
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