बलिया। दुर्गा प्रतिमाओं के विसर्जन को लेकर प्रशासन ने पूरी तैयारी कर ली है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद गंगा में प्रतिमाओं के विसर्जन पर रोक लगी हुई है। इसके तहत जिले में विभिन्न स्थानों पर गड्ढे खुदवाकर उसमे पानी भरवाने के बाद प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाना है। इसको लेकर प्रशासन पूरी तरह से तैयारियों में जुटा है। शुक्रवार को विसर्जन वाले स्थानों का अधिकारियों ने जायजा लिया और आवश्यक दिशा निर्देश दिए।
कोर्ट के आदेश के बाद जिला प्रशासन द्वारा मूर्ति विसर्जन के लिए पहले से ही जिले में 52 स्थानों को चिह्नित किया जा चुका है। इसमें शहर कोतवाली के जमुआ नवीन परती, ओझवलिया पोखरा में मूर्ति विसर्जन किया जाएगा। दुबहर क्षेत्र के जौहरी माता पोखरा भड़सर, ओझवलिया, गायघाट, पचरूखिया (गंगा नदी के छाड़न) में मूर्ति विसर्जन किया जाएगा।
जबकि सुखपुरा थाना के गांव का पोखरा, सुरहाताल दक्षिणी, गड़वार थाना के गांव का पोखरा, फेफना में सेमरा घाट, तीखा पुल, मटही पुल, टोंस नदी में विसर्जन होगा। उधर, नरहीं थाना में दो, चितबड़ागांव में एक, बैरिया में तीन, हल्दी में दो, दोकटी में एक, बांसडीहरोड में तीन, सहतवार में तीन, मनियर में दो, सिकंदरपुर में चार, पकड़ी में दो, रसड़ा में एक, नगरा में एक, भीमपुरा में आठ, उभांव में दो स्थानों मूर्ति विसर्जित की जाएगी।
विसर्जन के लिए जिन तालाब व गड्ढों में पानी कम है या नहीं है। उन सभी में जिला प्रशासन द्वारा पानी भरने का निर्देश संबंधित अधिकारी व ग्राम प्रधान को दिया गया है। इसके अलावा गंगा व घाघरा नदी के घाटों के किनारे जिला प्रशासन द्वारा जेसीबी मशीन से गड्ढा खोदवा कर उसमें पम्पगिंग सेट से पानी भरवाया गया है। नदियाें में मूर्तियों का विसर्जन किसी भी सूरत में न हो। इसके लिए जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। शुक्रवार को प्रशासनिक अधिकारियों ने विसर्जन के लिए खुदवाए गए गड्ढों का जायजा लिया। इस दौरान जिन गड्ढों में पानी नहीं था उसमें पानी भरने का निर्देश दिया।