लालगंज। दोकटी थाना क्षेत्र के भुसौला घाट कटान के शुरू हुए साल (लगभग 10 वर्षो) से डेंजर जोन बना हुआ है। इन वर्षो में अब तक हर साल लगभग आधा दर्जन डूबने की घटनाएं हुई हैं। पर इसको रोकने की बात तो दूर घटना घटने के बाद शव को निकलने के लिए भी शासन-प्रशासन के पास किसी के पास कोई व्यवस्था नहीं है। पिछले दो दिनों दो किशोरों की मौत के बाद भी शासन प्रशासन इसके लिए गंभीर नहीं दिख रहा है।
दोकटी थाना क्षेत्र के भुसौला घाट पर क्षेत्र के सैकड़ों लोग प्रत्येक दिन गंगा स्नान करते हैं। किसी त्योहार या संस्कार के दिन तो तो इसकी संख्या हजारो में हो जाती है। इस दौरान यह डूबने की घटनाएं भी लगभग हर साल दो चार जरूर हो जाती है। पर शासन प्रशासन के पास डेंजर जोन चिह्नित करने की फुर्सत तक नहीं है। जिससे घटनाओं पर अंकुश लग सके। घटना के बाद मौके पर पहुंचना क्या किया जाय कह अपनी बेबसी जता देना अधिकारियों की फितरत सी बन गई है। जबकि केवल बांस और झंडी से डेंजर जोन को चिह्नित कर देने मात्र से इन घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सकता है। यही नहीं यदि घटना घट जाती है तो शव को निकलने तक की व्यवस्था प्रशासन के पास नहीं है न कोई सरकारी गोताखोर की व्यवस्था है और न ही कोई जाल जिससे शव को निकाला जा सके, सभी राम भरोसे है। गंगा से लाश उतराई मिली तो ठीक नहीं तो बह गई। देखना है कि मंगलवार निरहू पुत्र संतोष उम्र 12 वर्ष निवासी हृदय पुर व बुधवार विवेक पाठक पुत्र अशोक पाठक उम्र 14 वर्ष निवासी मुरार पट्टी की उक्त घाट पर डूब जाने बाद भी शासन प्रशासन की नींद खुलती है या फिर अगले घटना की प्रशासन इंतजार करता है। लोगों की मानें तो केवल डेंजर जोन चिह्नित कर देने मात्र से घटनाओ में कमी लाई जा सकती है। इस संदर्भ में उपजिलाधिकारी बैरिया राधेश्याम पाठक से पूछने पर बताए की बहुत जल्द ग्राम प्रधानों से बात कर डेंजर जोन चिह्नित कर दिया जाएगा।