फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सोलह कुर्बानियां देकर बैरिया थाने पर लहराया तिरंगा

विज्ञापन
विज्ञापन
बैरिया। जिले में कई दिनों से चल रहे अगस्त क्रांति का असर हरेक नागरिक पर हो चला था। जो जहां था वहीं से अंग्रेजी हुकूमत का विरोध करने के लिए कमर कस चुका था। एक दिन पहले बांसडीह में क्रांतिकारियों को मिली विजय से आम लोगों के हौसले काफी बुलंद थे। भयभीत जिला प्रशासन को जान बचाने के लिए भी जुगत लगानी पड़ रही थी। जिलेभर के रेलवे स्टेशन फूंक दिए गए थे और रेल पटरियों को उखाड़ दिया गया था। दो दिन पहले बैरिया में भूपनारायण सिंह, सुदर्शन सिंह के साथ हजारों की भीड़ के आगे थानेदार काजिम ने खुद ही थाने पर तिरंगा फहराया था और थाना खाली करने के लिए क्रांतिकारियों से दो दिन की मोहलत मांगी थी। लेकिन थानेदार ने उसी दिन रात में जिला मुख्यालय से पांच सशस्त्र पुलिसकर्मियों को बुला लिया था और रात में तिरंगे को उतारकर फेंकवा दिया। इसकी भनक लगते ही क्रांतिकारियों ने थानेदार से बदला लेने के लिए 18 अगस्त तय किया था। दोपहर होते-होते 25 हजार से अधिक की भीड़ ने थाने को घेर लिया। महिलाओं के जत्थे की अगुवाई धनेश्वरी देवी, तेतरी देवी, राम झरिया देवी कर रही थीं।
विज्ञापन


भूपनारायण सिंह, सुदर्शन सिंह, परशुराम सिंह, बलदेव सिंह, हरदेव सिंह, राजकिशोर सिंह, बैजनाथ साह, राजकुमार मिश्र आदि भीड़ का नेतृत्व कर रहे थे। थाने पर बढ़ती भीड़ को देख थानेदार ने थाने के छत पर सिपाहियों संग पहुंच कर मोर्चा संभाल लिया। इस बीच क्रांतिकारियों से थानेदार ने बात की लेकिन क्रांतिकारी इस धोखेबाज थानेदार पर विश्वास नहीं कर रहे थे। इसी बीच कुछ लोग थाने में बगल से घुस गए और थाने के घोड़े को खोलकर अस्तबल ढहा दिया साथ ही सैकड़ों की भीड़ थाने में घुस गई। इधर पुलिस ने गोली चलानी शुरु की तो उधर क्रांतिकारियों ने भी पथराव शुरु कर दिया।

कौशल कुमार छलांग लगाकर तिरंगा लिए थाने की छत पर पहुंच गए उसे फहरा दिया, लेकिन पुलिस ने गोली मार दी जिससे वह शहीद हो नीचे गिर पड़े। शाम तक चले इस संघर्ष में 16 लोग थाने परिसर में ही शहीद हो गए लेकिन भीड़ जमी रही। कारतूस खत्म होने के कारण थानेदार और सिपाही जिस क्रांतिकारी नहीं थे उस ओर से भाग खड़े हुए। शहीद होने वालों में गोन्हिया छपरा निवासी निर्भय कुमार सिंह, देवबसन कोइरी, विशुनपुरा निवासी नरसिंह राय, तिवारी के मिल्की निवासी रामजनम गोंड, चांदपुर निवासी रामप्रसाद उपाध्याय, टोलागुदरीराय निवासी मैनेजर सिंह, सोनबरसा निवासी रामदेव कुम्हार, बैरिया निवासी रामबृक्ष राय, रामनगीना सोनार, छठू कमकर, देवकी सोनार, शुभनथही निवासी धर्मदेव मिश्र, मुरारपट्टी निवासी श्रीराम तिवारी, बहुआरा निवासी मुक्तिनाथ तिवारी, श्रीपालपुर निवासी विक्रम सोनार, भगवानपुर निवासी भीम अहीर शामिल थे। जबकि दयाछपरा निवासी गदाधर नाथ पांडेय, मधुबनी निवासी गौरीशंकर राय, गंगापुर निवासी रामरेखा शर्मा सहित तीन लोगों की जेल यातना में मृत्यु हुई। इसके अलावा भी कितने क्रांतिकारियों को जेल की काल कोठरी में दाल दिया गया, जिसका नाम तक प्रकाश में नहीं आ सका।
विज्ञापन


चौकीदारों को किया नंगा, तोड़े पुल और जलाए स्टीमर घाट
बलिया। नरहीं थाने से पांच चौकीदार अपने-अपने गांवों को वापस जा रहे थे। सोहांव स्कूल के पास जनता ने उनकी वर्दी-पेटी उतरवाकर जला दिया और चौकीदारों को नंगे खड़ा कराकर बहुत देर तक उनसे महात्मा गांधी की जय और वंदे मातरम का नारा लगवाया और बाद में छोड़ दिया। नरहीं के ओंकारानंद, हरिद्वार राय, जगत लाल, जगदीश राय, नारायणपुर के ब्रह्मदेव राय, कोटवां के शिवमुनी मल्लाह, सोहांव के बाला राय, लक्ष्मणपुर के डा. रामदहिन राय, चौरा के जंग बहादुर सिंह आदि के साथ आम लोगों ने भरौली में सड़क का पुल तोड़ दिया। कोटवां, नारायणपुर और उजियार में स्टीमर घाट को क्षतिग्रस्त कर आग लगा दी।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें