विशुनपुरा(बलिया)। नहरों में पानी नहीं है और दूसरी ओर गांवों में लो वोल्टेज की समस्या बरकरार है। ऐसे में किसान धान की नर्सरी कैसे डाले ये सोचकर परेशान हैं। दो से 15 जून नर्सरी के लिए मुफीद मानी जाती है, लेकिन 12 तारीख बीत चुकी है और नहरें और माइनर सब सूखे हैं।
नहर में पानी न आने से किसानों का कार्य सुचारु रूप से नहीं हो पा रहा है। दोहरी घाट पंप कैनाल और तुर्तीपार मुख्य नहर से जुड़ी सिकंदरपुर माइनर, पंदह माइनर, भीमपुरा नंबर माइनर सहित कई नहरों से सैकड़ों गांवों के किसान लाभान्वित होते हैं। मालीपुर, विशुनपुरा, इनामीपुर, नरहीं, जमुआव, चरौवा आदि गांव नहर के पानी से लाभान्वित होते हैं। नहर की सिल्ट की सफाई कराई गई ताकि टेल तक पानी पहुंच सके। लेकिन यह सारी कवायद बेमतलब साबित हो रही है। तुर्तीपार पम्प कैनाल से तो कहने के लिए पानी छोड़ा गया है लेकिन माइनरों में टेल तक पानी पहुंचना मुश्किल लग रहा है। ऐसे में किसान प्रकृति पर ही निर्भर है।
विशुनपुरा गांव निवाशी दीना सिंह ने बताया कि नहरें में पानी न आने से धान की नर्सरी डालने में देरी हो रही है। प्रदेश सरकार ने नहरों में पानी छोड़ने का निर्देश महकमे को दिया है, लेकिन क्षेत्र के किसानों को जब पानी की जरूरत पड़ती है। तब नहरों में धूल उड़ती नजर आने लगती है। जब किसान अपनी व्यवस्था से काम कर लेते हैं तो नहरों में पानी आता है। यही नहीं किसानों की गर्मी की फसलें तथा गर्मी की सब्जियों को भी पानी की महती आवश्यकता है। लेकिन क्षेत्र की नहरें व माइनर सूखे पड़े हैं।