बलिया। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण और उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश पर शनिवार को दीवानी न्यायालय परिसर में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। प्रशासनिक न्यायमूर्ति (सेशन डिवीजन) बलिया, इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति डॉ. गौतम चौधरी ने दीप प्रज्ज्वलित कर लोक अदालत का उद्घाटन किया। दिनभर चली कार्रवाई में दीवानी, फौजदारी, राजस्व, बैंक, विद्युत, पारिवारिक और मोटर दुर्घटना समेत विभिन्न श्रेणियों के 68,656 वादों का निस्तारण किया गया। इन मामलों में कुल 27,04,41,642 रुपये की समझौता धनराशि तय हुई, जबकि मौके पर 20,97,27,574 रुपये की वसूली की गई।
उद्घाटन अवसर पर जनपद न्यायाधीश अनिल कुमार झा, प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय अश्वनी कुमार दूबे, मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण के पीठासीन अधिकारी संजीव तिवारी, नोडल अधिकारी लोक अदालत प्रथम कान्त, जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह, पुलिस अधीक्षक डॉ. ओमवीर सिंह, क्रिमिनल बार एसोसिएशन अध्यक्ष देवेंद्र कुमार मिश्र और सिविल बार एसोसिएशन अध्यक्ष जीतेंद्र बहादुर सिंह मौजूद रहे। दीवानी न्यायालय की विभिन्न पीठों ने 2,166 वादों का निस्तारण किया। इनमें फौजदारी मामलों के साथ एनआई एक्ट, सिविल, उत्तराधिकार और अन्य मामले शामिल रहे। उत्तराधिकार प्रमाणपत्र के मामलों में 1,40,85,624.44 रुपये की राशि से संबंधित प्रमाणपत्र जारी किए गए। फौजदारी मामलों में अर्थदंड के रूप में कुल 5,37,960 रुपये और समझौते के माध्यम से 3.10 लाख रुपये की राशि तय हुई।
परिवार न्यायालय में प्रधान न्यायाधीश अश्वनी कुमार दूबे ने 13 और अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश कमला पति ने 41 वैवाहिक वाद निस्तारित किए। मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण ने 25 मामलों का निस्तारण करते हुए पीड़ित पक्षों के लिए 1,43,20,000 रुपये प्रतिकर निर्धारित किया। राजस्व विभाग ने सर्वाधिक 31,329 वाद और विद्युत विभाग ने 34,130 वाद निस्तारित किए। विद्युत मामलों में 17,68,91,000 रुपये की समझौता धनराशि तय हुई। बैंकों ने प्री-लिटिगेशन के 934 मामलों का निस्तारण कर 6,45,04,206 रुपये की समझौता राशि तय की, जिसमें 3,22,77,614 रुपये मौके पर वसूल किए गए।
दूरसंचार विभाग के 10 मामलों में 58,610 रुपये तथा उपभोक्ता फोरम के आठ मामलों में 2,72,202 रुपये की कार्रवाई हुई।
न्यायमूर्ति डॉ. गौतम चौधरी ने विवादों का सुलह-समझौते से समाधान और मध्यस्थता को प्रभावी माध्यम बताया। जनपद न्यायाधीश अनिल कुमार झा ने न्याय को सरल, सुलभ और मानवीय बनाने पर जोर दिया।