बेल्थरारोड। लोकसभा चुनाव को लेकर सलेमपुर क्षेत्र में हलचल बढ़ गई है। संसदीय क्षेत्र के देवरिया जिले के भाटपार रानी, सलेमपुर और बलिया जिले के बेल्थरारोड, सिकंदरपुर, बांसडीह विधानसभा क्षेत्रों में चुनावी सरगर्मी बढ़ जाने से सुनसान और वीरान रहने वाले गांव तथा चट्टी-चौराहे पर नेताओं की चहलकदमी से गुलजार हो गए हैं। वहीं, जातिगत मतों को सहेजने और गैर बिरादरी में सेंध मारी की कवायद देखी जा रही है।
लोकसभा चुनाव का बिगुल बजने के बाद प्रत्याशियों के चयन को लेकर आम जनमानस में बहस शुरू हो गई है। भाजपा ने निवर्तमान सांसद रवींद्र कुशवाहा पर विश्वास जताते हुए 16वीं लोकसभा के लिए प्रत्याशी बनाया है, जबकि बसपा के प्रदेश अध्यक्ष आरएस कुशवाहा अपने लाव- लश्कर के साथ व्यापक रूप से जनसंपर्क कर रहे हैं। हालांकि, कांग्रेस ने अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं। जातीय समीकरण पर गौर करें तो इस प्रतिष्ठापरक सीट पर सात बार कुशवाहा समाज के लोगों ने जीत का सेहरा बांधा।
1977 में जनता पार्टी के रामनरेश कुशवाहा ने जीत का परचम लहराया। भाजपा सांसद रवींद्र कुशवाहा के पिता हरि केवल प्रसाद ने 1989, 1991, 1998 और 2004 में जीत दर्ज की, वहीं कुशवाहा समाज से जुड़े हरिवंश सहाय ने 1996 में जीत दर्ज की। इसके अलावा दो बार राजभर समाज से जुड़े बब्बन राजभर ने 1999 और रमाशंकर राजभर ने 2009 में सीट पर कब्जा जमाया। लोकसभा चुनाव में राजनीतिक दलों द्वारा कुशवाहा समाज को तरजीह दी गई है, लेकिन चुनाव में निर्णायक भूमिका अदा करने वाले राजभर समाज के लोग अपने को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। दलों द्वारा टिकट के मामले में राजभर की अपेक्षा किये जाने से राजभर मतदाता मायूस हैं, जो चुनाव में अप्रत्याशित भूमिका निभाएंगे।