बलिया। प्रधानमंत्री आवास योजना में विभिन्न ब्लाकों के वैसे लाभार्थियों को चिन्हित किया जा रहा है, जो किश्त लेने के बाद भी निर्माण शुरू नहीं कराया। अब तक 155 लाभार्थियों को चिह्नित किया गया है जो किस्त लेने के बाद भी निर्माण कार्य शुरू नहीं किए। जिनके खिलाफ आरसी जारी करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। अमर उजाला के खुलासा के बाद अब विकास विभाग की नींद खुली है।
प्रधानमंत्री आवास निर्माण योजना जिले में वर्ष 2016-17 से लागू है। लेकिन यह योजना पूरी तरह अधिकारियों व कर्मचारियों के मनमानी का शिकार होकर रह गई है। अधिकारियों और ग्राम प्रधानों की मिलीभगत से अधिकांश गांवों में अपात्रों को आवास का आवंटन करने का खेल जारी है। कमोवेश सभी गांवों में पूर्व के आवास योजना से लाभान्वित परिवार को ही आवास देकर रंगाई पुताई कर नया कर दिया गया और आवास योजना की धनराशि का बंदरबांट कर लिया गया। जबकि आवास निर्माण की मॉनीटरिंग के लिए सरकार की ओर से फूलप्रूफ व्यवस्था बनाई गई है। इसके तहत भारत सरकार की ओर से संबंधित गांवों के लाभार्थियों की सूची सीधे संबंधित ब्लॉक के बीडीओ की लॉगिन पर भेजा जाता है। इसके बाद बीडीओ की ओर से सूची को संबंधित गांव के सचिव को उपलब्ध कराते हुए सूची का सत्यापन ग्राम सभा की खुली बैठक में कराने के उपरांत पात्रों को आवास देने की संस्तुति की जाएगी। फिर सूची का सत्यापन सेक्टर अधिकारी करेंगे और इनकी संस्तुति के बाद बीडीओ की ओर से लाभार्थी की पत्रावली डीआरडीए को भेजी जाएगी। लेकिन जिले में अधिकांश मॉनीटरिंग कागजों पर ही करके कोरम किया गया है। अमर उजाला के लगातार खुलासा के बाद अब विकास विभाग के अधिकारी भी हरकत में आए हैं। पीडी ने सभी ब्लॉकों से आवास प्रगति की रिपोर्ट मंगाई है और वैसे लाभार्थियों को चिह्नित किया जा रहा है जो किश्त लेने के बाद भी अब तक आवास का निर्माण शुरू नहीं करा सके हैं, जबकि उन्हें कई बार संबंधित सचिव की ओर से नोटिस दिया गया है। पीडी की मानें तो ऐसे कुल 155 लाभार्थी चिह्नित किए गए हैं और अब इनके खिलाफ धन की रिकवरी के लिए आरसी जारी की जाएगी।