बलिया। कर्मठ, ओजस्वी व्यक्त्वि एवं विद्या अनुरागी एक लंबी काया के धनी व्यक्ति थे स्व. विक्रमादित्य पांडेय। वे जागरूक प्रधानाध्यापक, उत्कृष्ट प्राचार्य, प्रसिद्ध शिक्षाविद व कुशल लोकसेवक भी थे। गंवई राजनीति से सफर शुरू कर प्रदेश की सियासत में वर्षों तक दमदार दखल रखने वाले जननेता विक्रमादित्य पांडेय आजीवन फकीर की तरह रहे। उनकी आंखें 14 जनवरी 2007 को आखिरी पल भी विकास का सपना संजोए ही बंद हुईं। स्व. पांडेय की पुण्यतिथि पर उनके पैतृक गांव के साथ ही जनपद के विभिन्न स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
सादा जीवन उच्च विचार को परिभाषित करने वाले पूर्व कैबिनेट मंत्री विक्रमादित्य पांडेय बेलहरी ब्लाक के पिछड़े गांव बसुधरपाह में जगन्नाथ पांडेय व समरातो देवी के पुत्र के रुप में एक जुलाई 1935 को पैदा हुए थे। इनकी पढ़ाई गांव से शुरू और गोरखपुर से आनर्स की डिग्री हासिल की। उन्होंने गंवई राजनीति से राजनीतिक सफर की शुरूआत की। गांव के प्रधान हुए और फिर बेलहरी ब्लाक प्रमुख के रूप में लगातार तीन बार चुने गए। मिलनसार स्वभाव के चलते बलिया नगर सीट से लगातार तीन बार विधायक व नगर विकास मंत्री तथा अंतिम समय में उच्च सदन विधान परिषद के सदस्य रहे। उनके प्रयास से ग्रामीण इलाकों में पानी टंकियां, सीवर योजना व शिवरामपुर घाट पर पीपापुल के अलावा बलिया स्टेडियम, आयुर्वेदिक चिकित्सालय को मूर्त रुप दिया। साथ ही बसंतपुर, छाता, दुबहर में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र व विद्युत घर, कदमतल्ला व नगवा में शहीद मंगल पांडेय की प्रतिमा और स्मारक, भृगु मंदिर का जीर्णोद्धार, राजकीय बालिका इंटर कॉलेज बसरिकापुर तथा नगवा में राजकीय महिला महाविद्यालय व पूरे क्षेत्र में दर्जनों नलकूप आदि कार्य कराए। उनके निधन पर तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने लखनऊ से बलिया आकर उन्हें आखिरी सफर को कंधा दिया था।