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महिलाओं के उत् थान पर निर्णय जल् द

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आधी आबादी के मौलिक अधिकार को लेकर प्रदेश सरकार ने सक्रियता दिखाया है। शासन के निर्देश पर राजस्व परिषद की टीम ने जिला व तहसील स्तर से महिलाओं को मिलने वाले सुविधाओं से सम्बंधित कई बिंदुओं पर रिपोर्ट तलब की है। रिपोर्ट के बाद विधान भवन में पांच जनवरी को विधान मंडल की महिला व बाल विकास सम्बंधी संयुक्त बैठक में समीक्षा की जाएगी तथा उनके उत्थान के सम्बंध में निर्णय लिया जाएगा।
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राजस्व परिषद के विशेष कार्याधिकारी सुनील कुमार झा, संत कुमार, संजय चावला, मोहम्मद असलम, श्रीमती अनामिका व श्रीमती रेनू मिश्र ने दो जनवरी को पत्र जारी किया। राजस्व परिषद की टीम ने जिला व तहसील स्तर पर जानकारी मंागा है कि कितनी महिला किन-किन पदों पर नियुक्त है। उन महिलाओं को मौलिक अधिकार मिल रहा है या नहीं। वर्ष 2014-15 से वर्ष 2016-17 तक कितनी महिलाओं का वरासत सम्बंधी मुकदमा लम्बित है। ऐसे में प्रदेश सरकार के सक्रियता से न्याय व अपने अधिकारों के लिए भटक रही आधी आबादी को निजात मिलने की आस जगी है।

बैरिया तहसील क्षेत्र में करीब पांच दर्जन आशा बहुएं, 100 से अधिक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिका, महिला एनजीओ के माध्यम से दर्जनों महिलाएं काम करती है। इनमें दर्जनों महिलाएं बुनियादी व मौलिक सुविधाओं से वंचित है। यही नहीं आज भी महिलाओं को घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न के अलावे छेड़खानी, बलात्कार जैसी घटनाओं से जूझना पड़ता है। कारण कि इन महिलाओं को आसानी से न्याय भी नहीं मिल पाता है।
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इस बाबत उपजिलाधिकारी राधेश्याम पाठक ने कहा कि शासन के निर्देश पर राजस्व परिषद ने महिलाओं के मौलिक अधिकारों के सम्बंध में जानकारी तलब किया है तहसील स्तर से रिपोर्ट भेज दी गई है।
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