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रतसर : प्रशासन सहयोग करे तभी खुलेंगी दूकानें

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रतसर। कस्बे में हुए बवाल के बाद दूकानदार इतना डरे हैं कि वह अधिकारियों की अपील के बाद भी दूकान खोलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे। उन्होंने गुरुवार को अधिकारियों से अपने दर्द बयां किए। कहा कि प्रशासन सहयोग करे तभी वह दूकान खोलेंगे। उन्हें सुरक्षा मुहैया कराई जाए ताकि वह बेखौफ होकर अपना कारोबार कर सकें।
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जिम संचालक कमाल खां ने बताया कि कई सालों तक पाई-पाई जुटा कर लाखों की लागत से जिम खड़ा किया था। कहा कि इसी की कमाई से वह परिवार का भरण पोषण करते थे। उपद्रवियों ने सब कुछ बर्बाद कर दिया है। दूकान का कोई बीमा भी नहीं है ऐसे में अब प्रशासन मदद करे तभी उनका कारोबार चल सकता है।
इलेक्ट्रानिक व घड़ी दूकान संचालक नईम अख्तर ने कहा कि उपद्रवियों ने उनकी दूकान में तोड़फोड़ कर सामान क्षतिग्रस्त कर दिए। इसके अलावा हजारों रुपए लूट लिए। अब प्रशासन की ओर से यदि सहायता मिलेगा तभी जीविका का साधन तैयार हो सकेगा। कपड़ा दूकानदार हिदायतुल्ला खां ने कहा कि यह दूकान उनकी पुश्तैनी थी जिसकी कमाई से परिवार का खर्च चलता था। उपद्रवियों ने दूकान के साथ ही घर में आग लगा दी। दूकान के साथ ही अब घर भी रहने लायक नहीं रह गया है। जनरल स्टोर संचालक मैनुद्दीन ने कहा कि उपद्रवियों ने उनके दूकान को पूरी तरह बर्बाद कर दिया है। तोड़फोड़ और आगजनी में 20 लाख की क्षति हुई है। बताया कि अब नए सिरे से दूकान को संजोने पर लंबा वक्त लगेगा।
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कस्बा में बुधवार को हुए बवाल को दोनो समुदाय के बुद्धिजीवी कलंक मान रहे हैं। उनका मानना है कि कुछ अराजकतत्वों ने इस ऐतिहासिक बाजार को कलंकित कर दिया जिसे भूलने का प्रयास किया जाएगा। बताया कि सैकड़ो साल पुराना यह बाजार एकता की मिसाल रहा है।
अध्यापक मेराज खालिद ने कहा कि एक जमाने से यह बाजार सांप्रदायिक सौहार्द का मिसाल रहा है। लेकिन अराजकतत्वों ने इसे कलंकित कर दिया।
व्पापारी राजकुमार ने कहा कि बुधवार को हुई घटना एक काला दिन रहा। अब सौहार्द कायम करने के लिए समाज के लोगों को भी जागरुक करेंगे।
व्यापारी सुभाष गुप्ता ने कहा कि कस्बा में हुए उपद्रव ने बाजार के इतिहास को कलंकित किया है। यहां किसी तरह का कोई तनाव नहीं रहा लेकिन कुछ अराजकतत्वों ने इसे धो डाला। कौव्वाल एकबाल वारसी ने कहा कि इस कस्बे में सांप्रदायिकता नाम की कोई चीज थी ही नहीं केवल कुछ अराजकतत्वों की सोच व पुलिस प्रशासन की विफलता की देन है। कहा कि दो लोगों में विवाद था, इसे पुलिस ने गंभीरता से लिया होता तो शायद कुछ न होता।
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