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60 प्रतिशत जलाशय खतरे में

Tue, 07 Mar 2017 10:36 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो /बलिया
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गांवों में पशु-पक्षियां व सिंचाई के लिए खोदे गए पोखरों की हालत अब खस्ता है। आंकड़ों पर गौर करें तो पता चलता है कि जिले भर के करीब साठ फीसदी पोखरों से धूल उड़ रही है या फिर अतिक्रमण का शिकार हो गए। इसका नतीजा यह है कि गर्मी शुरू होते ही जहां पशु पक्षी पानी के लिए भटकने लगे हैं। दूसरी ओर किसान सिंचाई के लिए मोटर पंप पर निर्भर हो गए हैं। इससे जलस्तर तेजी से नीचे खिसकने लगा है। आने वाले दिनों में पानी का संकट उत्पन्न हो सकता है।
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जिले के 17 विकास खंडों में 833 ग्राम पंचायत हैं, जिसमें कुल 1632 पोखरे हैं। इसमें 60 फीसदी पोखरे सुख चुके हैं। बाकी अंतिम सांस ले रहे हैं। सर्वोच्च न्यायालय ने इन जलगाहों को संरक्षित करने का आदेश दिया है। लेकिन सरकार इस पर गंभीर नहीं है। हनुमानगंज व दुबहर विकास खंडों की बात करें तो इन दिनों ब्लाकों में 95 ग्राम पंचायतें हैं, जहां 73 पोखरे हैं। इसमें से 23 पोखरे सुख चुके हैं। बानगी के तौर पर मिड्ढा गांव के काली मंदिर स्थित पोखरा व बाजार स्थित ताल पिछले कई सालों से सूखे पड़े हैं। रसड़ा ब्लाक पर नजर डालें तो यहां 60 ग्राम पंचायत है, जिसमें 23 पोखरे सूखे हैं। उदाहरण के तौर पर नगर के कोटवारी के पास खिरोधर का पोखरा व मतलही के पास तेलिया का पोखरा, पंच मंदिर के पास बहुरिया का पोखरा, काली जी का पोखरा तथा छोटकी बउली जैसे नगर के प्रमुख तालाबों से आज धूल उड़ रही है।


बेल्थरोड ब्लाक में 75 ग्राम पंचायत है, जहां 98 पोखरे हैं। इसमें से 73 पोखरे बदहाली पर आंसू बहा रहा है। खासकर नगर की चारों तरफ व्यवसायिक दूकानें बन गई हैं। बिचला पोखरा का अस्तित्व समुचित देखरेख के अभाव में मिटने के कगार पर है। यही हाल पश्चिम पोखरा का भी है। नगरा ब्लाक की बात करें तो यहां 81 ग्राम पंचायत है व 26 पोखरे हैं। लेकिन इसमें से 14 पोखरे सूख चुके हैं। इलाके के अति प्राचीन खाकी बाबा के पोखरे पिछले कई सालों से मरम्मत के अभाव में जर्जर हो गया है। इस पोखरे से पशु पक्षी गर्मी के दिनों में काफी राहत पाते थे, लेकिन यह पोखरा भी सूख चुका है। यही हाल संत सुदर्शन के पोखरे का भी है। सिकंदरपुर ब्लाक में कुल 86 ग्राम पंचायतें हैं, जहां 97 पोखरे में से लगभग छह दर्जन पोखरे सूख चुके हैं। एक तरफ जहां जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है, वहीं प्रशासन उपेक्षा कर रहा है।
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