बलिया। गंगा एक्सप्रेस-वे की 593 किलोमीटर लंबी दोनों पटरियों पर 500 हेक्टेयर क्षेत्र में करीब 5.50 लाख पौधों का रोपण किया जाएगा। नदियों के दोनों तटों पर पीपल, बरगद और जामुन के पौधे रोपे जाएंगे।
जिले को हरा-भरा बनाने और पर्यावरण संतुलन को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से प्रशासन ने पौधरोपण अभियान को लेकर अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। बुधवार को विकास भवन सभागार में जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह की अध्यक्षता में जिला पौधरोपण, जिला गंगा एवं जिला पर्यावरण समिति की बैठक हुई। बैठक में इस वर्ष बड़े पैमाने पर पारंपरिक पौधरोपण के साथ-साथ शासन की मंशानुरूप विभिन्न अनूठे थीम आधारित वनों की स्थापना पर विशेष जोर दिया गया।
प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी प्रभाग पृथ्वीराज केएसबी ने बताया कि वर्ष 2026 में पर्यावरण और सामाजिक आवश्यकताओं के अनुसार विशेष प्रकार के वन विकसित किए जाएंगे। भीषण गर्मी और हीट वेव से आमजन को राहत दिलाने के लिए मुख्य सड़कों व सार्वजनिक स्थलों पर पीपल, बरगद, पाकड़, नीम, आम और कदम्ब जैसे विशाल छायादार पौधे लगाए जाएंगे। शहरी इलाकों में फलदार पौधों का रोपण किया जाएगा।
सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर की 135वीं जयंती के उपलक्ष्य में समरस वन की स्थापना होगी। स्वतंत्रता दिवस पर देश के वीरों की स्मृति में 150 पौधों की विशेष वाटिकाएं सजाई जाएंगी। पारंपरिक चिकित्सा और स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए औषधीय पौधों के विशेष वन विकसित किए जाएंगे।
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ग्रीन चौपाल से बढ़ेगी जनभागीदारी
ग्रामीण स्तर पर पर्यावरण के प्रति चेतना जगाने के लिए सभी ग्राम पंचायतों में ग्रीन चौपाल का आयोजन किया जाएगा। इसके साथ ही सहजन भंडारा एवं आम भंडारा के तहत औषधीय गुणों से भरपूर सहजन और आम की देशी प्रजातियों के पौधों का मुफ्त वितरण और रोपण होगा।
सभी संबंधित विभाग अपने-अपने लक्ष्यों के अनुरूप शीघ्र स्थलों का चयन करें और विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर प्रस्तुत करें। इस महाअभियान में पौधों को लगाने के साथ-साथ उनके संरक्षण की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी। — मंगला प्रसाद सिंह, जिलाधिकारी, बलिया