बांसडीहरोड। विकास खंड दुबहर अंतर्गत सरांक गांव बीते दो दशक से विकास की बाट जोह रहा है। गांव में बजबजाती नालियां, टूटी सड़कें, जर्जर तार, लटके खंभे विकास कार्य को मुहं चिढ़ा रहे। औरते आज भी खुले में शौच को विवश हैं। गंदगी के चलते संक्रामक रोग फैलने की आशंका है।
रमेश राजभर ने बताया कि गांव में एक 25 केवीए का ट्रांसफार्मर सहित विद्युत सप्लाई होती है। जिससे लो-वोल्टेज के कारण आए दिन पंखा, सीएफएल सहित अन्य उपकरण जलते रहते हैं। कहा कि गांव में दो दशक से विद्युतीकरण नहीं हुआ है। जिससे जर्जर तार व लटके खंभे से ग्रामीणों को हमेशा खतरा बना रहता है। गांव की ममता देवी, रानी देवी ने बताया कि गांव में शौचालय नहीं होने से महिलाएं खेतों में जाती है। जिससे संक्रामक रोग फैलता है। साथ ही विभाग द्वारा आज तक गांव में शौचालय नहीं बनवाया गया, जिससे महिलाएं खेतों में जाकर शर्मिंदगी महसूस करती है। कहा कि अगर घर में शौचालय बन जाता है तो छींटाकशी का शिकार नहीं होना पड़ेगा।
ग्राम प्रधान कौशल सिंह ने बताया कि गांव के विकास के लिए विभाग को नाली, खड़ंजा, शौचालय के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। विभाग से धन आने पर गांव का विकास कराया जाएगा।