बलिया। जिले में संचालित वृद्धाश्रम की जांच में कई गड़बड़ियां मिली हैं। डीएम ने आठ अधिकारियों की टीम से कराई गई जांच रिपोर्ट के आधार पर वृद्धाश्रम संचालन का अनुबंध निरस्त करने तथा संचालित महिला महाविद्यालय की मान्यता निरस्त करने की कार्रवाई आवश्यक बताया है। अमर उजाला ने एक नवंबर के अंक में इसका खुलासा किया था और जांच चल रही थी।
गड़वार क्षेत्र में वृद्धाश्रम के नाम पर लाखों के गोलमाल मामले में भाजपा राष्ट्रीय परिषद के पूर्व सदस्य सुशील चौरसिया व भाजपा नेता सुजीत सिंह परमार ने मुख्यमंत्री से शिकायत कर मामले की जांच कर कार्रवाई करने की गुहार लगाई थी। शासन ने इस मामले में जांच कर रिपोर्ट जिलाधिकारी से मांगी और डीएम ने इसकी जांच के लिए सीडीओ की अध्यक्षता में आठ सदस्यीय टीम गठित कर दी। टीम में सीडीओ के अलावा एसडीएम सदर, पीडी, डीडीओ, वरिष्ठ कोषाधिकारी, जिला विद्यालय निरीक्षक, जिला समाज कल्याण अधिकारी व आरईएस के एक्सईन थे। जांच में सामने आया कि वृद्धाश्रम का संचालन रामधारी सिंह महिला महाविद्यालय में एक अनुबंध के आधार पर चल रहा है। महिला महाविद्यालय में छात्राओं व शिक्षिकाओं की सुरक्षा तथा मान्यता की शर्तों के अनुसार किसी अन्य संस्था को चलाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। एक ही भवन तथा परिसर में वृद्धाश्रम व महिला महाविद्यालय संचालित किया जाना महाविद्यालय एवं वृद्धाश्रम की शर्तों का उल्लंघन है। जांच टीम ने माना कि उच्च शिक्षा के प्रमुख सचिव व निदेशक स्तर से महिला महाविद्यालय की मान्यता निरस्त करने तथा निदेशक समाज कल्याण स्तर से श्रीटान इंडिया लि. के माध्यम से संचालित वृद्धाश्रम का अनुबंध निरस्त करने की आवश्यकता है। टीम की रिपोर्ट को जिलाधिकारी ने कार्रवाई के लिए शासन को भेज दिया है।
यह है मामला
बलिया। मई 2017 में सरकार ने वृद्धाश्रम संचालन के लिए एनजीओ का निर्धारण किया था। जिले में वृद्धाश्रम संचालन के लिए श्रीटान इंडिया लिमिटेड नाम के एजेंसी का निर्धारण करते हुए धनराशि का आवंटन किया गया। शासन से यह भी तय किया गया कि वृद्धाश्रम में 25 से अधिक वृद्धों के रहने की दशा में सरकार की ओर से वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। शासन की ओर से वृद्धाश्रम संचालन के लिए संबंधित एजेंसी को करीब 16 लाख आवंटन करते हुए व्यवस्था की जिम्मेदारी दी गई लेकिन इसकी यूटिलाइजेशन रिपोर्ट की जिम्मेदारी जिला समाज कल्याण अधिकारी को दी गई।