कठौड़ा रेगुलेटर का फाटक ठीक तरह से बंद न होने के कारण हो रहा रिसाव चौथे दिन सोमवार को भी जारी रहा। इसे अब तक पांच सौ एकड़ से अधिक ज्वार, बाजरा, धान, मक्का की बोई फसल डूब गई, वहीं जोत कर छोड़ी गई हजारों एकड़ खेत भी जलमग्र हो चुकी है। खेतों में पानी भरने से नौ गांवों के सैकड़ों किसान प्रभावित हैं।
खेतों में दो से 5 फीट तक पानी लगा हुआ है। इससे किसानों के समक्ष विकट स्थिति उत्पन्न हो गई है। फाटक बंद करने के लिए युद्धस्तर पर कार्य जारी है। हालांकि अधिकारियों का दावा है कि रात तक रिसाव बंद कर दिया जाएगा।
जानकारी के अनुसार, कठौड़ा रेगुलेटर के फाटक से पानी के रिसाव के कारण कठौड़ा गांव निवासी बैजनाथ, बिस्वनाथ राय, सोनू राय, प्रवीण कुमार, अरविंद राय, विश्वनाथ राय, तारकेश्वर, नमो नारायण राय, देवभूषण राय, नरेंद्र राय, धनु राय, प्रदीप द्विवेदी, रामजन्म राय, उपेंद्र राय, चिंटू राय आदि की सैकड़ों एकड़ में बोई गई फसल डूब गई है।
इसको लेकर किसानों में भारी आक्रोश है। किसानों का कहना है कि अगर तत्काल रिसाव बंद नहीं हुआ तो भारी नुकसान का उन्हें सामना करना पड़ेगा। जिसकी भरपाई करनी मुश्किल होगी। उन्होंने विभागीय अधिकारियों पर धीमे गति से कार्य करने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि समय रहते यदि फाटक बंद करने का कार्य शुरू कर दिया गया होता तो उनकी फसल नहीं डूबती। उधर, शनिवार को आनन फानन में पहुंचे अधिशासी अभियन्ता कुमार गौरव व एसडीओ आरएस यादव ने मौका मुआयना कर हालात का जायजा लिया था, वही जेई को तत्काल मजदूर लगाकर बालू से भरी बोरी डालकर पानी के दबाव को कम करने का निर्देश दिया था।
अधिकारियों के आदेश के बाद राहत कार्य शुरू हुआ, लेकिन वह ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रहा है। सोमवार की सुबह तक फाटक से रिसाव बंद नहीं हो सका था, अगर समय रहते रेगुलेटर से रिसाव बंद नहीं हुआ तो कठौड़ा, जमुई, डूहाबिहरा, नरहनी, मझवलिया, मुईया, झोरिडीह, तिवारीपुर, भीमहर सहित दर्जनों गांव के हजारों एकड़ खेत व बोई हुई फसल बर्बाद हो जाएगी।