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50 गांव अब भी जी रहे हैं ढिबरी युग में

Mon, 24 Oct 2016 08:18 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला,बलिया
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बिजली - फोटो : अमर उजाला
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भले ही एलईडी लाइट का हो गया हो, लेकिन भृगुनगरी में आज भी करीब पचास गांव ढिबरी युग में जीने को विवश हैं। केवल प्रकाश व्यवस्था न होने के कारण इन गांवों के लोग हाईटेक युग से पिछड़ रहे हैं। ऐसे में इन गांवों के लोगों की दीपावाली इस बार भी बगैर बिजली के मनने वाली है।
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हालांकि केंद्र सरकार की तरफ से शुरू की गई दीनदयाल विद्युतीकरण योजना का शुभारंभ होने के बाद लोगों को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में कोई भी गांव बिजली से वंचित नहीं रह जाएगा। ऐसा विभागीय अधिकारियों का भी कहना है। जनपद के अंतिम छोर तथा बिहार बार्डर से सटे बैरिया तहसील की बात करें तो इस तहसील ने जयप्रकाश नारायण जैसा लोक नायक दिया।

बावजूद इस तहसील के बैजनाथपुर ग्राम पंचायत अंतर्गत रामपुर टोला, वशिष्ठ नगर तथा गोपाल नगर के आधे हिस्से में आज भी विद्युतीकरण का काम नहीं हुआ। जिससे लगभग पांच हजार की आबादी आज भी यहां लालटेन के सहारे जिंदगी जी रहे हैं। इसी प्रकार कैबिनेट मंत्री रामगोविंद चौधरी के तहसील क्षेत्र बांसडीह की बात करें तो पिंडहरा गांव के रघुनाथपुर मौजा, नकहरा तिवारी के रानीबाड़ी के लगभग 2500 आबादी आज भी बिजली से वंचित है।
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गुलाबनगरी व कैबिनेट मंत्री मोहम्मद रिजवी के तहसील क्षेत्र सिकंदरपुर की बात करें तो पश्चिम टोला, सीवानकला, मेहता नईबस्ती, नेमा के टोला पूरब आदि गांवों की लगभग 18 हजार की आबादी आज भी ढिबरी युग में जिंदगी जीने को विवश है। विद्युतीकरण की बात करें तो जनपद से सटे पांच किमी की दूरी पर कंसपुर दियर के कई पुरवा आज भी विद्युतीकरण से वंचित है। 
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