मझौवां। गंगा नदी के जलस्तर में लगातार उतार-चढ़ाव से तटवर्ती इलाकों के लोगों में अब भी बाढ़ को लेकर भय है। गंगा नदी का जलस्तर शनिवार को भी चेतावनी बिंदु 56.615 मीटर से ऊपर बना रहा। 40 फीसदी आबादी को अब भी राहत किट का इंतजार है।
प्रभावित गांवों के दूबे छपरा, गोपालपुर, उदयी छपरा, सुघर छपरा, वंश गोपाल छपरा, मुरली छपरा, पाण्डेयपुर, नौरंगा, भुआल छपरा, चक्की नौरंगा, उपाध्याय टोला के 40 फीसदी लोग आज भी राहत सामग्री से वंचित हैं। अब तक उन पीड़ितों को राहत किट नहीं पहुंचाई गई है। जिन बाढ़ पीड़ितों को सहायता नहीं मिली है, उनमें भारी आक्रोश देखा जा रहा है। संजय चौधरी, यदुनाथ मिश्र, सुरेन्द्र ठाकुर, राजमंगल ठाकुर, जगदत ठाकुर, लाली मियां, शंकर यादव, मुन्ना पाण्डेय, नागेंद्र तिवारी का आरोप है कि प्रशासनिक उदासीनता और असमान वितरण व्यवस्था के कारण वे अब भी भोजन, पीने के पानी, दवा और रहने की समुचित व्यवस्था से वंचित हैं। स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि अविलंब सभी प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री पहुंचाई जाए और बाढ़ से पीड़ित परिवारों को तत्काल सहायता उपलब्ध कराई जाए। ऊषा देवी ने बताया कि घर पानी में डूब गया था। कई दिनों से बच्चों के साथ ऊंचे स्थान पर शरण लिए हुए हैं, लेकिन अब तक कोई मदद नहीं मिली।
फिलहाल, गंगा के जलस्तर में स्थिरता जरूर दिखाई दे रही है, लेकिन बाढ़ के डर ने लोगों की नींदें उड़ी हुई हैं। जब तक पानी वार्निंग लेबल से नीचे नहीं उतरता और राहत पूरी तरह नहीं पहुंचाई जाती, तब तक तटवर्ती इलाकों के लोगों की पीड़ा बनी रहेगी। केन्द्रीय जल आयोग गायघाट गेज पर शनिवार की शाम 4 बजे गंगा नदी का जलस्तर 57.270 मीटर दर्ज किया गया। नदी का जलस्तर स्थिर है। गंगा चेतावनी बिन्दु से 56.615 मीटर से 655 सेंटी मीटर ऊपर बह रही है।