बलिया। कार्तिक पूर्णिमा स्नान के बाद सोमवार से शुरू ददरी मेला सजधज कर तैयार है। लेकिन मेले में आए झूले, चरखी के संचालन पर अभी तक ग्रहण लगा हुआ है। कारण है मेला क्षेत्र की जमीन का दलदली होना। जमीन दलदली होने के कारण नगर पालिका प्रशासन झूला के संचालन की अनुमति देने से इंकार कर दिया है। उसने गेंद जिला प्रशासन के पाले में डाल दी है। नगर पालिका का कहना है कि जमीन दलदली है, इसलिए उस लगे झूले के फाउंडेशन के मजबूत होने पर संदेह है।
अध्यक्ष अजय कुमार ने बताया कि विगत वर्षों में घटित घटनाओं के मद्देनजर व दलदली जमीन को देखते हुए उनकी ओर से चरखी के संचालन पर रोक लगाई गई है। दलदली जमीन का हवाला देते हुए जिला प्रशासन को पत्र लिखा गया है। अब जिला प्रशासन की परमिशन मिलने के बाद ही चरखी व झूले का संचालन संभव है। गौरतलव हो कि मेला में चरखी व झूले मेलार्थियों के लिए सबसे अधिक मनोरंजन की चीज है। ऐसे में इसका संचालन न होने पर मेला पर इसका साइड इफेक्ट पड़ सकता है, क्योंकि युवा वर्ग चरखी व झूले का आनंद लेने के लिए ही मेला आते हैं। बीते माह आई भयानक बाढ़ के बाद पानी तो निकल गया, लेकिन जमीन काफी दलदली हो गई है। इस वजह से नगर पालिका ने इनके संचालन से अपना हाथ पीछे खींच लिया है। अब जिला प्रशासन द्वारा जमीन की जांच होने के बाद ही झूला का संचालन हो पाएगा या यह स्पष्ट हो पाएगा।
ददरी के चलते छोड़ दिए दूसरा मेला
बलिया। मेले में दो बड़े झूले, एक ड्रैगन, ब्रेक डांस, ट्रेन आदि कुल छह झूले आए हैं। लगातार दूसरे दिन भी बंद होने के कारण झूला संचालकों का कहना है कि हम मेला में आकर फंस गए हैं। दूसरे दिन भी लेबरों को बैठाकर पैसा देना पड़ा। मेला के चलते हम लोग दूसरा मेला छोड़ दिए हैं। ऐसे में यदि परमिशन नहीं मिली तो हमारा काफी नुकसान हो जाएगा।
पांच साल में हो चुकी तीन की मौत
बलिया। दलदल जमीन के मद्देनजर चरखी के संचालन पर रोक सही है या गलत यह तो प्रशासन जाने या नगर पालिका। हांलाकि हकीकत ये है कि पिछले पांच सालों में ददरी मेला में झूला से हुए अलग-अलग हादसों में अब तक तीन लोग जान गंवा चुक हैं। वर्ष 2014 में दुबहर क्षेत्र की नेहा यादव की झूले में गिरने से मौत हो गई थी। 2016 में नरहीं के कंचन खरवार की भी झूले से गिरने से मौत हो गई थी। बीते वर्ष एक युवती सेल्फी लेते समय अंसतुलित होकर झूले से गिर गई थी और उसकी मौत हो गई थी।
नगर पालिका अध्यक्ष बलिया अजय कुमार का कहना है कि दलदल जमीन को देखते हुए हम झूले और चरखी का रिस्क हम नहीं ले सकते। मनोरंजन से ज्यादा हमारे लिए जान की कीमत है। मेरे द्वारा जिला प्रशासन को पत्र लिखा गया है। जिला प्रशासन जैसा निर्णय लेंगा किया जाएगा।
आर के प्रसाद अवर अभियंता, लोनिवि प्रांतीय खंड का कहना है कि दलदली जमीन में झूले का फाउंडेशन यदि मजबूती से बनाया गया हो तो उसके संचालन में कोई खतरा नहीं है। फाउंडेशन आदि की जांच के बाद अनुमति दी जा सकती है।