सूबे की सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में 14 घंटे बिजली देने का दावा मजबूती के साथ कर रही है, जबकि नगरा क्षेत्र में चार से पांच घंटे ही बिजली उपलब्ध हो पा रही है। इसमें भी आलम यह है कि हर आधे घंटे पर बिजली ट्रिप कर रही है। जिससे बिजली का रहना और नहीं रहना बराबर हो जा रहा है। इसको लेकर क्षेत्र के लोगों में विभाग के विरुद्ध नाराजगी है।
नगरा विद्युत उपकेंद्र से जुड़े कसौंडर, अब्दुलपुर मदारी, ताड़ीबाड़ा गांव, निकासी, मलप, मालीपुर, परसिया, कमरौली, विशुनपुरा, नरहीं, डिहवां, जुड़नपुर, ढेकवारी सहित दर्जनों गांवों को विद्युत आपूर्ति होती है। इस विद्युत उपकेंद्र पर करीब एक साल पहले चार फीडर हुआ करता था। क्षमता बढ़ाने के लिए लाखों रुपया खर्च कर पांच फीडर बना दिया गया।
यहां तक कि मशीनों को भी बदलकर नया कर दिया गया। बावजूद विद्युती आपूर्ति में अब तक कोई सुधार नहीं हो सका है। सूबे की सरकार का ग्रामीण क्षेत्रों में 14 घंटा बिजली देने का दवा हवाहवाई साबित हो रही है। उपकेंद्र के कर्मचारी मशीनों को नहीं अब जर्जर विद्युत तारों को दोषी बताकर पल्ला झाड़ ले रहे हैं।
इसको लेकर क्षेत्र के लोगों में काफी नाराजगी है। क्षेत्र के पूर्व प्रधान श्यामनारायण सिंह, यशवंत सिंह, विजय चौधरी, शत्रुंजय चौबे आदि ने विद्युत आपूर्ति के साथ ही जर्जर तारों को बदलने की मांग की है। ताकि क्षेत्र के लोगों को शासन की मंशा के मुताबिक विद्युत मिल सके।