विद्युत विभाग की ओर से उपभोक्ताओं को मीटर लगाने की अनिवार्यता कर दी गई है। लेकिन अधिकांश इलाकों में समय से मीटर की रीडिंग नहीं हो पाती है और उपभोक्ताओं को गलत बिल भेज दिया जाता है। इतना ही नहीं कई मीटर रीडर तो जब चाहे मीटर रीडिंग कर बिल बना देते हैं जिससे समय से भुगतान करने वाले उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ता है। 213 मीटर रीडरों पर 3.31 लाख उपभोक्ताओं के रीडिंग की जिम्मेदारी है।
विद्युत चोरी रोकने व उपयोग के सापेक्ष बिजली बिल को लेकर विभाग की ओर से प्रत्येक उपभोक्ताओं के लिए मीटर अनिवार्य हो चुका है। लेकिन इसके रीडिंग की माकूल व्यवस्था विभाग की ओर से नहीं की गई है। इसके चलते मीटर रीडिंग भी काम चलाऊ तरीके से ही किया जा रहा है। लेकिन इसका खामियाजा उपभोक्ताओं को ही भुगतना पड़ता है। बताया जाता है कि आमतौर पर हर महीने में मीटर रीडिंग का प्रावधान है जो माह के पहले सप्ताह में होना चाहिए और उसी रीडिंग के आधार पर उपभोक्ताओं का बिल जारी होना चाहिए। लेकिन जिले में ऐसा नहीं हो पा रहा है। आलम यह है कि जिन उपभोक्ताओं के यहां मीटर लगा है उनका बिल भी मीटर नहीं दिखा कर फिक्स चार्ज के आधार पर तो जिनके यहां मीटर नहीं लगा उनके बिल में मीटर रीडिंग दिखा कर बिल भेज दिया जाता है। बिना रीडिंग या मीटर के बावजूद फिक्स चार्ज वाले बिल सुधारने के लिए उपभोक्ताओं को कार्यालय का चक्कर काटना पड़ता है। बताया जाता है जिले में कुल 213 मीटर रीडर ही हैं जिनके जिम्मे 3.31 लाख उपभोक्ताओं की मीटर रीडिंग है। इससे सहज ही मीटर रीडिंग का अंदाजा लगाया जा सकता है।
नगरीय व ग्रामीण क्षेत्रों के उपभोक्ताओं के लिए मीटर रीडिंग की अलग-अलग व्यवस्था है। ग्रामीण क्षेत्रों में इन मीटर रीडरों को जिम्मेदारी दी गई है, जबकि नगरीय क्षेत्रों में एजेसिंया मीटर रीडिंग कर बिल वसूली करती हैं। मीटर रीडिंग में लापरवाही सामने आने पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई भी की जाती है।
- नरेंद्र प्रकाश, अधिशासी अभियंता विद्युत, बलिया।