जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग ने जिले में यूपी बोर्ड परीक्षा
नकलविहीन कराने का दावा किया है। काफी मशक्कत के बाद जिला परीक्षा समिति ने
322 विद्यालयों को परीक्षा केंद्र बनाया है।
अब तक जनपद के यूपी बोर्ड
परीक्षा के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है कि केंद्रों की संख्या 300 के
आंकड़े को पार की है। परीक्षा केंद्रों की संख्या अधिक होने से
छात्र-छात्राओं को परीक्षा देने में सहूलियत मिलेगी।
अब देखना है कि जिला
परीक्षा समिति को यूपी बोर्ड परीक्षा नकलविहीन कराने में कितने सफलता मिलती
है। इसका असर पर शिक्षा माफियों पर कितना पड़ता है।
जिला परीक्षा समिति
ने एक माह पहले 217 विद्यालयों को परीक्षा केंद्र बनाकर सूची प्रकाशित की
थी, लेकिन अंतिम सूची गत सात सितंबर तक जारी नहीं किया गया था।
काफी
माथापच्ची के बाद गत आठ अक्तूबर के अंक में अमर उजाला में एक खबर ‘केंद्र
निर्धारण में देरी, उठ रहे सवाल’ के बाद आनन-फानन में जिला प्रशासन ने गत
मंगलवार को 105 और विद्यालयों को परीक्षा केंद्र बनाने के साथ ही 322
विद्यालयों की सूची गत मंडल समिति को भेज दी।
विभागीय सूत्रों की माने तो
बढ़ाए गए परीक्षा केंद्रों में डिबार विद्यालय भी शामिल किए गए हैं। गौरतलब
हो कि 322 में से 217 विद्यालयों को एक माह पहले ही केंद्र बनाकर सूची
जारी कर दी गई थी।
इसके बाद अन्य केंद्रों के निर्धारण से पहले परीक्षा
प्रभारी संतोष कुमार जायसवाल को हटा दिया गया। यहीं नहीं उनकी जगह पर
जीआईसी के एक लिपिक को परीक्षा प्रभारी बनाया गया था।
मगर उनके द्वारा
अपनी परेशानियों को बताते हुए प्रभार लेने से मना कर दिया गया। ऐसे में
जिला परीक्षा समिति ने करीब एक माह के मशक्कत के बाद 105 और विद्यालयों को
बोर्ड परीक्षा केंद्र बनाया है।
अब देखना है कि परीक्षा केंद्र बढ़ाने
के बाद जिला परीक्षा समिति परीक्षा को नकलविहीन और सकुशल परीक्षा संपन्न
कराने में सफल मिलती है या पिछले साल की तरह इस साल भी शिक्षा माफियाओं के
आगे घुटने टेक देती है।
इस बाबत जिला विद्यालय निरीक्षक ने बताया कि
बोर्ड परीक्षा को सकुशल और नकलविहीन संपन्न कराने के लिए जिला समिति ने
322 विद्यालयों को परीक्षा केंद्र बनाकर मंडल समिति को भेज दिया है।