बलिया। गांवों में तैनात सफाईकर्मियों के वेतन पर प्रति माह पांच करोड़ रुपये खर्च होने के बाद भी गांवों की साफ-सफाई नहीं हो पा रही है। कई गांवों में तो मानक के अनुसार सफाईकर्मियों की तैनाती भी नहीं है। गांवों में सफाई कार्य नहीं किए जाने की शिकायत अक्सर की जाती है।
पंचायती राज विभाग की ओर से वर्ष 2008-09 में जनपद में कुल 2403 राजस्व गांवों में एक-एक सफाईकर्मी की नियुक्ति हुई और वर्ष 2009-10 में इनकी तैनाती की गई। हालांकि वर्तमान में कुल 2319 सफाईकर्मी कार्यरत हैं। तैनाती के बाद से ही जिले में सफाईकर्मियों को मनमाने तरीके से काम लिया जा रहा है। सफाईकर्मियों के वेतन पर हर महीने पंचायती राज विभाग की ओर से करीब पांच करोड़ की धनराशि का भुगतान किया जाता है। इसके अलावा प्रत्येक ग्राम पंचायत में संसाधनों के लिए हर साल 30 से 50 हजार रुपये धनराशि खर्च होती है जो करीब चार करोड़ की होती है।
इतनी धनराशि खर्च होने के बाद भी गांवों की सफाई नहीं हो पा रही है। प्रत्येक राजस्व गांव में एक सफाईकर्मी की तैनाती का प्रावधान है लेकिन 10 साल बाद भी गांवों में मानक के अनुसार तैनाती नहीं की गई। किसी गांव में चार तो किसी गांव में एक भी सफाईकर्मी तैनात नहीं हैं। सोहांव ब्लॉक के गांवों को देखें तो ब्लॉक के 10 हजार से अधिक आबादी वाले सबसे बड़े गांव नरहीं में चार तो नारायनपुर में तीन सफाईकर्मी हैं जबकि छोटे गांव बभनौली में तीन व करंजामाफी में दो सफाईकर्मी तैनात हैं। इतना नहीं कुल्हड़ियां गांव केवल कागजों पर चल रहा है और पूरा गांव गंगा की कटान में समाप्त हो चुका है वहां भी दो सफाईकर्मी तैनात किए गए हैं। ब्लाक के बड़े गांवों में शुमार भरौली में एक भी सफाईकर्मी तैनात नहीं हैं।
जनपद के अधिकांश कार्यालयों में सफाईकर्मियों को शासनादेश के विपरीत संबद्ध किया गया है। नियुक्ति के बाद से ही जिला पंचायत राज कार्यालय में आधा दर्जन सफाईकर्मी तैनात हैं। इसके अलावा डीडीओ, सीडीओ, जिला दिव्यांग जन कल्याण, समाज कल्याण आदि कार्यालयों में वर्षों से 80 सफाईकर्मी संबद्ध हैं। इसके अलावा कई अफसरों के बंगले पर भी सफाईकर्मी ड्यूटी बजाते हैं। करीब छह सालों से जिला चुनाव कार्यालय व सदर तहसील कार्यालय में कई सफाईकर्मी संबद्ध किए गए हैं। काफी हो हल्ला के बाद कुछ माह पहले इनको हटाया गया लेकिन फिर वहीं संबद्ध कर दिया गया।
शासन की ओर से सफाईकर्मियों के वेतन भुगतान के लिए प्रावधान किया गया है कि संबंधित गांव के प्रधान की ओर से पे रोल जारी किया जाएगा। इसके बाद उसका सत्यापन संबंधित एडीओ पंचायत करके उनके वेतन भुगतान की संस्तुति डीपीआरओ कार्यालय को भेजेंगे। लेकिन शासनादेश के विपरीत विभिन्न कार्यालयों में संबद्ध सफाईकर्मियों के वेतन का भुगतान संबंधित अधिकारी की संस्तुति पर किया जाता है।
डीपीआरओ एसडी पांडेय ने बताया कि अधिकारियों की मांग पर सफाईकर्मियों को संबद्ध किया गया है। गांवों में तैनात सफाईकर्मियों को नियमित सफाई करने का निर्देश दिया गया है। लापरवाही सामने आने पर संबंधित सफाईकर्मी के खिलाफ कार्रवाई भी की जाती है। संबद्ध सफाईकर्मियों के वेतन का भुगतान संबंधित कार्यालयाध्यक्ष के पे-रोल के आधार पर किया जाता है।