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92 हजार लोगों के पास है पेटीएम की सुविधा

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बलिया। नोटबंदी के बाद पेटीएम और अन्य दूसरे मोबाइल वॉलेट का चलन बढ़ गया है। कुछ दिन बाद सरकार ने खुद भीम ऐप भी लांच किया था। हालांकि आज की तारीख में बैकों व एटीएम से आसानी से रुपये मिल जाने के कारण इसके चलन में कमी आई है। इसके बावजूद अधिकांश लोग समय-समय पर इस ऐप का प्रयोग कर रहे हैं। केवल पेटीएम के ही जिले में 92 हजार लोगों के पास सुविधा है।
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नोटबंदी के एक साल पूरे होने को हैं। शुरुआत के दिनों में बैंकों व एटीएम से रुपये नहीं मिलने के कारण लोग काफी परेशान रहे। इसको देखते हुए डिजिटल भुगतान पर सरकार ने जोर दिया और पेटीएम और अन्य मोबाइल वॉलेट का चलन भी बढ़ गया। हालांकि इसके प्रयोग को लेकर कई तरह की परेशानियां आईं। खासकर गरीब व मजदूर तबके के लोगों के लिए यह संभव नहीं हो सका क्योंकि व दो जून की रोटी का इंतजाम करें या मोबाइल खरीदें। इसी बीच भारत सरकार की ओर से मोबाइल से लेन-देन करने के लिए भीम ऐप लांच कर दिया। इसका प्रचार-प्रसार भी जोरों पर कराया गया। आलम यह है कि आज भी विभिन्न कंपनियों की ओर से मोबाइल वॉलेट की सुविधा देने में जुटी हैं। जिले में पेटीएम फ्रेंचाइजी मनोज कुमार की मानें तो जनपद में 92 हजार लोगों तक इसकी सुविधा पहुंचाई गई है। हालांकि जैसे-जैसे समय बीता वैसे-वैसे इसके चलन में कमी भी आई है। बाजारों में अधिकांश खरीदारी लोग नगद करने में विश्वास करते हैं। हालांकि पैसे कम पड़ जाने या अन्य कारणों की स्थिति में ही लोग पेटीएम या अन्य सेवाओं का प्रयोग करते हैं।

सालभर में 65 हजार से अधिक ने कराया नेट बैंकिंग
बलिया। नोटबंदी के दौरान कैश की किल्लत को देखते हुए जहां व्यापारियों की ओर से पीओएस मशीन लगाने के लिए बैंकों में भीड़ रही वहीं जागरुक वर्ग अपने खाते पर इंटरनेट बैंकिंग की सुविधा लेने को बैचेन रहे। खासकर जिले के एसबीआई व सेंट्रल बैंक में सबसे अधिक भीड़ रही। सेंट्रल बैंक के एलडीएम डीके सिन्हा की मानें तो शुरुआत के दिनों में इंटरनेट बैंकिंग के लिए काफी भीड़ रही लेकिन आज भी लोग यह सुविधा लेने के लिए आवेदन कर रहे हैं। बताया कि एक साल में 65 हजार से अधिक खाताधारकों ने इंटरनेट बैंकिग सुविधा के लिए आवेदन किया।
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सुचारु रुप से नहीं चल पाते पीओएस मशीन त
बलिया। नोटबंदी के बाद डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न बैंकों की ओर से जगह-जगह कैंप लगाकर पीओएस मशीन का वितरण किया गया। हालांकि इन मशीनों के संचालन में आज भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। व्यापारियों की मानें तो सबसे बड़ी परेशानी इंटरनेट सेवा की है। आए दिन सर्वर खराब रहने के कारण पीओएस मशीन काम नहीं करते हैं और शिकायतों के निस्तारण में बैंक के अधिकारी भी रुचि नहीं लेते हैं।

80 फीसदी दुकानों पर है पीओएस मशीन
बलिया। नोटबंदी के बाद पीओएस मशीनों के लगाने में नगरीय इलाकों के दुकानदार काफी आगे रहे। हालांकि ग्रामीण इलाकों में भी बड़े दुकानदारों ने पीओएस मशीन लगवाया है। एलडीएम की मानें तो नगरीय इलाकों के करीब 90 फीसदी और ग्रामीण इलाकों के करीब 70 फीसदी कुल औसत 80 फीसदी दुकानदारों के यहां पीओएस मशीन लगी है। नगरीय इलाकों में तो किसी तरह यह मशीन काम भी करती है लेकिन ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट सेवा बाधित होने के कारण यह सुचारु रुप से काम नहीं करती है। शहर के व्यापारियों की मानें की मानें तो 15 से 20 फीसदी ग्राहक ही कार्ड से भुगतान करते हैं।
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