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गजब! थाना उतर प्रदेश में और डाकखाना बिहार में

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दयाछपरा(बलिया)। बैरिया तहसील के गंगा उस पार बसे 50 हजार की आबादी वाले नौरंगा, भुवाल छपरा समेत लगभग आधा दर्जन गांव आज भी अपने दुर्भाग्य पर आंसू बहाने को विवश हैं। दुनिया जहां 21वीं शताब्दी में प्रवेश करने को आतुर है, वहीं विकास से कोसो दूर ये गांव अभी काफी पिछड़े हुए हैं। मानचित्र में भी इस गांव को अजीबो-गरीब सूरत मिली है। थाना उत्तर प्रदेश में है, जबकि डाकखाना बिहार में। लगभग 10 हजार मतदाताओं वाले इन गांवों की याद जनप्रतिनिधियों को भी चुनाव के समय ही आती है।
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नौरंगा में जो डाकघर है, वो जिला शाहाबाद बिहार के नाम से है। अपने डाकखाने के लिए ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से लेकर जनप्रतिनिधि से भी गुहार लगाई। फिर भी डाकघर का नाम नहीं बदला। वर्ष 1932 में उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के नौरंगा समेत कुल 19 गांव बिहार के शाहाबाद जिले में चले गए थे। त्रिवेणी आयोग के सीमांकन के बाद फरवरी 1970 में बिहार से नौरंगा, भुआल छपरा, भगवानपुर, उदई छपरा, दुबेछपरा सहित12 गांव उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में आ गए, लेकिन डाकघर आज भी शाहाबाद बिहार के नाम से है। इससे ग्रामीणों के पत्र व्यवहार में काफी परेशानी उठानी पड़ती है। बैरिया तहसील क्षेत्र के गंगा उस पार बसे नौरंगा, भुआल छपरा सहित अन्य गांवों में मूलभूत सुविधाएं, जैसे बिजली, पानी, शिक्षा, चिकित्सा, आवागमन आदि भी मयस्सर नहीं है। उत्तर प्रदेश और बिहार के साथ समझौते के तहत गंगा उस पार बसे गांवों बयासी, जवही दियर को बिजली बिहार से दी गई। वहीं, बिहार के गांव खवासपुर को बलिया से बिजली दी गई। उस समय नौरंगा के ग्रामीणों में आस जगी थी कि बिजली आएगी। आज तक गांव में बिजली मयस्सर नहीं हुई। ग्रामीणों का कहना है कि आजादी के बाद से चुनाव के समय ही जनप्रतिनिधि आते हैं और कोरा आश्वासन देकर चले जाते हैं।
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