बलिया। जिले में कुल 37 चकबंदी गांव हैं, जिनमें से 30 गांवों में पांच साल से ज्यादा समय से 26 हजार से ज्यादा मामले लंबित हैं। इसपर जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह ने मामलों के निपटारे में हो रही देरी पर अधिकारियों को शीघ्र निस्तारण के निर्देश दिए हैं। तीन सीओ को नोटिस जारी करने का आदेश दिया है।
शुक्रवार को विकास भवन सभागार में चकबंदी विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान उन्होंने स्पष्ट कहा कि राजस्व एवं चकबंदी विभाग के कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि पांच वर्ष से ज्यादा पुराने सभी मुकदमों का प्राथमिकता के आधार पर निपटारा किया जाए। प्रत्येक पुराने मुकदमे की अलग फाइल तैयार कर उसके निस्तारण के लिए कार्ययोजना बनाई जाए।
बैठक में बताया गया कि जिले में कुल 37 चकबंदी गांव हैं, जिनमें से 30 गांवों में पांच वर्ष से अधिक पुराने मामले लंबित हैं। इस पर जिलाधिकारी ने नाराजगी जताते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि ऐसे सभी मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जाए। समीक्षा के दौरान यह भी सामने आया कि विभिन्न तहसीलों में निर्धारित मानकों के अनुरूप मुकदमों का निस्तारण नहीं हो रहा है। इस पर जिलाधिकारी ने चकबंदी अधिकारियों (सीओ) को कड़ी फटकार लगाई और मानक के अनुसार कार्य करने का निर्देश दिए। उन्होंने मुकदमों के निस्तारण में लापरवाही पाए जाने पर सभी सीओ को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश भी दिए।
जिलाधिकारी ने कहा कि मुख्यमंत्री के स्पष्ट निर्देश हैं कि राजस्व एवं चकबंदी विभाग के कार्यों में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए। इसलिए सभी अधिकारी अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी जिम्मेदारी के साथ करें। उन्होंने अधिकारियों को प्रत्येक गांव में नियमित चौपाल लगाने, ग्रामीणों की शिकायतें सुनने तथा उनका समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। साथ ही एसीओ और सीओ को अपने कार्यक्षेत्र की तहसीलों में नियमित रूप से बैठकर जनता की समस्याएं सुनने और लंबित मुकदमों की सुनवाई कर उनका निस्तारण करने को कहा। बैठक में मुख्य विकास अधिकारी ओजस्वी राज, सीआरओ गुलशन जी, एडीएम अनिल कुमार, सिटी मजिस्ट्रेट आसाराम वर्मा रहे।