बैरिया। माता-पिता को भरण-पोषण के एक मामले में उपजिला मजिस्ट्रेट बैरिया विपिन कुमार जैन ने वृद्धा के पक्ष में फैसला सुनाया। तहसील क्षेत्र में वरिष्ठ नागरिक कल्याण अधिनियम 2007 का यह पहला मामला है, जिसमें माता के पक्ष में फैसला हुआ।
दोकटी थाना क्षेत्र के बहुआरा निवासिनी सुदमिया देवी पत्नी द्वारिका सिंह ने उपजिला मजिस्ट्रेट न्यायालय बैरिया के यहां वरिष्ठ नागरिक कल्याण अधिनियम के तहत शिकायत की थी कि उसके पति के मृत्यु के बाद सारा जमीन के अभिलेख पर पुत्र रामकुमार सिंह का नाम दर्ज हो गया है। पुत्र भरण-पोषण नहीं दे रहा है। उसे घर से बेदखल किया जा रहा है। मामले में 1 अप्रैल को नोटिस भेजकर रामकुमार सिंह को न्यायालय में तलब किया गया था। इस क्रम में विगत 06 अप्रैल को रामकुमार सिंह न्यायालय में प्रस्तुत हुए। विगत 08 अप्रैल को अपने माताजी के साथ न्यायालय में उपस्थित हुए।
रामकुमार सिंह ने अपना पक्ष रखा कि वह हरिद्वार में नौकरी करते हैं। अपने माता जी को भरण-पोषण के लिए प्रति माह एक हजार रुपया देते हैं। हालांकि माता सुदमिया देवी ने कहा कि डेढ़ वर्ष से हमें एक रुपया नहीं मिला है। जबकि दोनों पक्ष से ज्ञात हुआ कि जमीन से प्रति वर्ष 20 हजार रुपये का लाभ होता है। दोनों तरफ से हुई बहस को सुनने के बाद उपजिला मजिस्ट्रेट विपिन कुमार जैन ने सीआरपीसी धारा 09 के तहत फैसला में कहा कि कृषि भूमि के संपूर्ण रकबे से प्राप्त आय को भरण पोषण हेतु माता सुदमिया देवी को दिया जाय। यह भी आदेश दिया गया कि नियमानुसार हर वर्ष भरण पोषण में बढ़ोतरी होगी। यह बढ़ोतरी 10 प्रतिशत से कम नहीं होगी।