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स्वच्छता अभियान की निकली हवा, पसरा गंदगी

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बलिया। जिले में स्वच्छता अभियान पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है, अधिकारी केवल कागजी कोरम कर रहे हैं। गांवों में तैनात सफाईकर्मी अफसरों से सेटिंग कर मटरगस्ती करते हैं, इसके चलते अधिकांश गांवों में जगह- कूड़े का अंबार है।
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गांवों में सफाई के नाम केवल कोरम किया जा रहा है।
एक ओर जहां स्वच्छता कार्यक्रम सरकार के एजेंडे पर है वहीं गांवों की सफाई को तैनात सफाईकर्मियों को सम्बद्ध कर अन्य कार्य कराए जाते हैं। इतना ही नहीं बीते एक साल में कई बार राज्य मंत्री के निर्देश के बावजूद न तो सम्बद्ध सफाईकर्मियों को गांवों में तैनात किया गया और न ही गांवों में मानक के अनुसार इनकी तैनाती ही की गई। पंचायती राज विभाग में कुल 2320 सफाईकर्मी कार्यरत हैं। लेकिन इसके बावजूद गांवों में सफाई का कार्य ध्वस्त है। बताया जाता है कि सफाईकर्मियों से आला अफसर से लेकर ब्लाक स्तरीय अधिकारी तक उन्हें संबद्घ कर अन्य कार्य लेते हैं। इसके अलावा गांवों में तैनात अधिकांश सफाईकर्मी भी ब्लाक स्तरीय अधिकारियों से सेटिंग कर मटरगस्ती करते हैं। आलम यह है कि ग्रामीणों की ओर से की गई शिकायतों पर भी अधिकारियों की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की जाती है। कई गांवों के मामले में तो प्रधानों की ओर से भी शिकायत की गई लेकिन इसके बावजूद विभागीय अधिकारी चुप्पी साधे रहे। अधिकारियों की उदासनीता के चलते गांवों में सफाई का कार्य कोरम बन कर रह गया है। बतौर उदाहरण सोहांव ब्लाक के भरौली, गोविंदपुर, सोहांव, टुटुवारी, नारायनपुर, उजियार, नरहीं आदि बड़ी आबादी वाले गांवों में जहां नालियां बजबजा रही हैं वहीं जगह-जगह लगे कूड़े का ढेर सफाई व्यवस्था को आईना दिखा रहा है। इन गांवों के ग्रामीण ही कभी कभार नालियों की आदि की सफाई करने को मजबूर होते हैं।

गांवों में तैनात सफाईकर्मियों को गांवों की साफ-सफाई का निर्देश दिया गया है। इस बाबत जहां से शिकायतें मिलती हैं संबंधित के खिलाफ कार्रवाई भी की जाती है। सफाई में लापरवाही बरतने के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। अभय कुमार यादव, डीपीआरओ, बलिया
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