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जाते-जाते जख्म दे गया दादर डिग्री कालेज का चुनाव

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बलिया। श्री बजरंग स्नातकोत्तर महाविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव के दौरान हुए हिंसा ने साल के अंत में सिकंदरपुर तहसील को एक और जख्म दे दिया। जो सिकंदरपुर तहसील में यादगार के रूप में जाना जाएगा। अब देखना यह है कि 2018 सिकंदरपुर में खुशी लाता है या जख्म देता है। हालांकि जिला प्रशासन और पुलिस महकमा पूरे वर्ष सतर्क रही।
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करीब 19 वर्ष पूर्व सिकंदरपुर कस्बा में महावीरी झंडा जुलूस के दौरान भी सांप्रदायिक हिंसा घटित हो गई थी। जिसमें दोनों समुदाय के हजारों लोगों पर मुकदमा दर्ज किया गया था। यह आग महीनों तक धधकती रही। इसके बाद सिकंदरपुर तहसील में धीरे-धीरे अमनचैन लौटा था। दोनों समुदाय के लोग गंगा-यमुना तरजीह पर कार्य करने लगे। लेकिन वर्ष 2017 में एक फिर विजयादशमी व ताजिया जुलूस के दौरान अराजकतत्वों ने अपने स्वार्थ के लिए सिकंदरपुर कस्बा को आग में झोंक दिया। जिसमें चले धारदार हथियार में आधे दर्जन से अधिक लोग जख्मी हो गए थे। यह सिलसिला तीन-चार दिनों तक चलता रहा। कस्बा में अमनचैन लौटाने के लिए जिला प्रशासन व पुलिस महकमा को महीने भर सतर्क रहना पड़ा और बुद्धिजीवियों से अनुरोध करना पड़ा। अभी यह मामला धीरे-धीरे ठंडा हो ही रहा था कि श्री बजरंग स्नातकोत्तर महाविद्यालय दादर में मतगणना के दौरान उपद्रवी छात्रों ने ईट-पत्थर चलाकर माहौल खराब कर दिया। जिसने साल के अंत में सिकंदरपुर तहसील को जख्म दे दिया। कस्बावासियों का कहना है कि देखना यह है कि नया साल अच्छा बीतता है या जख्म देता है।
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