बलिया। प्रांतीय सीमा भरौली से लाल बालू के आवक पर गुरुवार की रात से रोक लग गई है। शासन के निर्देश पर डीएफओ ने कार्रवाई की है। अमर उजाला के खुलासा पर महकमे की नींद खुली है। डीएफओ की कार्रवाई से बालू माफियाओं में खलबली मची है। उधर, सीमा पर हुए करोड़ों के गोलमाल की जांच चल रही है।
भरौली-बक्सर सीमा के बीच बना गंगा पुल का रास्ता विभिन्न तरह की तस्करी के लिए कुख्यात है। इस रास्ते से रेडीमेड व पशु तस्करी तो होती ही है, पिछले तीन सालों से लाल बालू का खेल भी जोरों पर है। नई सरकार बनने पर जो काम पहले दिनदहाड़े होता था अब रात के अंधेरे में हो रहा है। 12 मई 2014 को बिहार सरकार ने मरम्मत के लिए गंगा पुल को भरी वाहनों के लिए प्रतिबंधित कर दिया। पुल के दोनों सिरे पर 8 फुट ऊंची लोहे की बैरिकेडिंग भी लगाई। इसके बाद से लाल बालू की तस्करी होने लगी। आलम यह रहा कि बिहार से ट्रैक्टर ट्रॉली से लाकर बालू को भरौली व आसपास के गांवों में डंप कर ऊंचे दामों पर बेचा जाने लगा।
नई सरकार के तल्ख तेवर के चलते पुलिस व व्यापार कर अधिकारियों की मिलीभगत से माफियाओं ने तरीका बदल दिया है, लेकिन गोरखधंधा बदस्तूर जारी है। रात होते ही ट्रॉलियों की खड़खडाहट शुरू हो जाती है। सीमा पर कभी भी व्यापार कर के उड़ाका दल का पता नहीं चलता है। पुल बंद होने के बावजूद सीमा वनकर्मियों की ड्यूटी लगती रही लेकिन तीन सालों में महज 7-8 वाहनों के खिलाफ ही कार्रवाई की गई और करोड़ों के राजस्व का गोलमाल किया गया। इसका खुलासा अमर उजाला ने किया तो वन विभाग के आला अफसरों जांच शुरू की है। लगातार कई खुलासा होने पर मामला शासन तक पहुंच गया है। गुरुवार की रात डी एफओ भरौली सीमा पर पहुंचे और जांच कर माना कि बालू की आवक अवैध है और वाहनों से कटे जाने वाले जुरमाना पर रोक लगाते हुए तैनात टीम को हटा दिया। डीएफओ राम अवतार सिंह ने बताया कि अब प्रवर्तन दल को तैनात किया गया है। बताया कि छोटे वाहनों से बालू ले आने पर संबंधित के खिलाफ केस और वाहन को सीज किया जाएगा।