जल ही जीवन है। इसके बगैर मनुष्य के साथ-साथ जीव-जंतु सबका अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। लेकिन मौजूदा समय में क्षेत्र के दर्जनों गांव का सूरत-ए-हाल ऐसा है कि लोग शुद्ध पानी के लिए मोहताज है। लगभग 20 हजार आबादी हैंडपंप के आर्सेनिकयुक्त पानी पीने को मजबूर है।
इस पर जिला प्रशासन भी संजीदा नहीं है। क्षेत्र के चंद्रपुरा, कुंवर जसांव, दवनी रूस्तमपुर, हरिपुर, मनियारी जसांव की आबादी लगभग 20 हजार है। शुद्ध पानी मुहैया कराने की दिशा में आजादी के बाद से अब तक किसी नेता ने ठोस पहल नहीं की। सिर्फ कागजी लेखाजोखा में सारे गांव को आर्सेनिक प्रभावित गांव बनाकर छोड़ दिए हैं।
शुद्घ पेयजल को जनप्रतिनिधि कभी अपना चुनावी मुद्दा नहीं बनाते। बल्कि लोगों को लोक लुभावन मुदा के साथ लोगों को बरगलाने का कार्य करते हैं। ऐसे में यहां के लोग आर्सेनिक युक्त पानी पीने के कारण अक्सर बीमार पड़ रहे हैं।
इनसेट....
हां आर्सेनिक प्रभावित गांव की फेहरिस्त में शामिल होने के बाद तीन आरओ प्लांट जरूर लगा। जो कि ऊंट के मुंह में जीरा समान है। कारण आबादी 20 हजार है। कुछ हद तक निजात मिली, लेकिन सब आरओ प्लांट मौजूदा समय में शो-पीस बन कर पड़ा है। मशीन में आई खराबी को ठीक करने के लिए भी विभाग के पास फुर्सत नहीं है।