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तीन साल बाद शुरु हुई मजिस्ट्रेटियल जांच, 20 लोगों ने दर्ज कराया बयान

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बैरिया। तीन साल पहले तत्कालीन मुख्य सचिव आलोक रंजन द्वारा 11 अगस्त 2015 को आर्सेनिक पीड़ितों के मामले की मजिस्ट्रेटियल जांच का निर्देश पर अब रंग लाया है। जिलाधिकारी भवानी सिंह खंगारौत के निर्देश पर गंगापुर ग्राम पंचायत सहित आसपास के गांवों में आर्सेनिकयुक्त पानी पीने से विभिन्न रोगों से पीड़ित व मृत लोगों की मजिस्ट्रेटियल जांच मंगलवार को शुरू हुई। 20 आर्सेनिक पीड़ितों ने एसडीएम सदर अश्वनी कुमार श्रीवास्तव व अपर सीएमओ डाक्टर केडी प्रसाद के समक्ष उपस्थित होकर अपना बयान दर्ज कराया।
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गंगापुर निवासी ऊषा देवी, रमेश यादव, कृष्णा यादव, संगीता देवी, बुचिया देवी, प्रभावती देवी, भगरसनी देवी, पवन खरवार, तेज नारायण मिश्र, तारक तिवारी, अवधेश पासवान, अवध बिहारी सिंह, शिवजी शर्मा, रजनी देवी, पप्पू यादव, पारस पटेल, निर्भय खरवार, सुधाकर यादव, ललन राम, संदीप तिवारी सहित 20 लोगों ने उपजिलाधिकारी को बयान दिया है। बताया कि अब तक यहां कई लोगों की मौत आर्सेनिक से हो चुकी है किंतु वह लिखा पढ़ी में कहीं प्रमाणित नहीं है क्योंकि मृतकों का पोस्टमार्टम नहीं कराया गया। वहीं गंगापुर ग्राम पंचायत की आधी आबादी आर्सेनिकयुक्त पेयजल के सेवन से लीवर, चर्मरोग, कैंसर सहित विभिन्न बीमारियों से पीड़ित है।
आर्सेनिक पीड़ित लोगों ने बताया कि इस गांव में चार आर्सेनिक रिमूवल आरओ भिखारी तुरहा के घर के सामने, तारकेश्वर तिवारी के घर के सामने, दीनानाथ सिंह के घर के सामने व विनोद साह के घर के सामने एक दशक पहले लगाए गए थे। रख-रखाव व मरम्मत के अभाव में सभी आरओ काफी दिनों से खराब पड़े हुए हैं अपर सीएमओ डा. केडी प्रसाद ने बताया कि जांच रिपोर्ट जिलाधिकारी के माध्यम से शासन को भेजा जाएगा। जिनकी मौत आर्सेनिक के चलते हुई है, उन्हें दो लाख रुपये की सहायता देने का प्रावधान है जबकि जो बीमार हैं उनका नि:शुल्क समुचित इलाज कराया जाएगा। वहीं खराब पड़े आर्सेनिक फिल्टरों को तुरंत ठीक कराया जाएगा
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