वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की 478वीं जयंती बुधवार को विभिन्न संगठनों की ओर से धूमधाम से मनाई गई। कुंवर सिंह इंटर कालेज के जय्रपभा सभागार में महाराणा प्रताप जयंती समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ महाराणा प्रताप के तैल चित्र पर कॉलेज के प्रबंधक व विधान परिषद सदस्य रविशंकर सिंह पप्पू ने दीप प्रज्जवलित व माल्यार्पण कर किया। समारोह का संबोधित करते हुए एमएलसी पप्पू सिंह ने कहा कि महाराणा प्रताप के जीवन का सारांश है कि मैं पूरी जिंदगी घास की रोटी और पानदी पीकर गुजार सकता हूं लेकिन किसी की पराधीनता स्वीकार नहीं है। यह लक्ष्य ही उनके जीवन के बारे में वर्णन कर देता है। आज हर मां एक प्रताप पैदा करना चाहती है ताकि उसकी शक्ति को देख कर दुश्मन डरे। एमएलसी ने कहा कि अगले साल से महाराणा प्रताप की जयंती व्यापक स्तर पर मनाई जाएगी। बेरुआरबारी ब्लॉक के पूर्व प्रमुख अनिल सिंह ने कहा कि महाराणा प्रताप सभी के आदर्श थे और उनका जीवन संघर्षोँ से भरा लेकिन अत्यंत गौरवशाली था। उनके जीवन से यह सीख मिलती है कि किसी भी दशा में अपन पथ से विचलित नहीं होना चाहिए। इस मौके पर मनोज सिंह, अमित सिंह बघेल, संजीव कुमार सिंह, शशि कुमार सिंह, प्रेमशंकर राय, जयंत सिंह, राजेश सिंह, विजय बहादुर सिंह, संजय कुमार सिंह, अमित सिंह बघेल आदि थे। अध्यक्षता अनिरुद्घ सिंह व संचालन राजेश कुमार सिंह ने किया।
उधर, अखिल भारतीय विकास संस्कृति साहित्य परिषद के जिला इकाई की ओर से आनंदनगर स्थित कार्यालय पर महाराणा जयंती पर गोष्ठी का आयोजन किया गया। महाराणा प्रताप पर आहुति नामक महाकाव्य के रचयिता डा. बृजेश सिंह ने काव्य पाठ किया। प्रो. केपी श्रीवास्तव ने कहबा कि विकट परिस्थितियों में भारत का सपूत मुगल वंश की सत्ता को झकझोरता रहा। इस मौके पर डा. फतेह चंद बेचैन, डा. आदित्य कुमार अंशु, सुदेश्वर अनाम, नवचंद्र तिवारी, डा. संतोष प्रसाद गुप्त, अशहर खुर्शीद, जितेंद्र त्यागी, अली अहमद संगम, राधिका तिवारी, बीएन शर्मा मृदुल, अशोक कंचन जमालपुरी, आनंद कुमार, विनय कुमार गुप्त, राकेश कुमार गुप्त, सूरज समदर्शी, अमावस यादव आदि थे।