बलिया। जीएसटी काउंसिल ने जिन 29 वस्तुओं व 53 सेवाआें पर दर बदलाव का फैसला किया गया है। उससे गरीब जनता और मध्यम वर्ग के ग्राहकाें का कोई फायदा होने वाला नहीं है। हालांकि शैक्षणिक संस्थानों में जीएसटी दर कम करना युवाआें और छात्रों के प्रति अच्छा कदम है। लेकिन जिस धान की भूसी पर कोई चार्ज नहीं था, उस पर पांच फीसदी चार्ज लगाकर सरकार ने गरीबों पर अत्याचार व शोषण करने का काम किया है।
कर अधिवक्ता जनक कुमार पांडेय का कहना है कि कीमती पत्थर, हीरा, घर खरीदना, बंद पानी की बोतल, स्ंिप्रकल आदि पर जीएसटी दर घटाने से गरीब व मध्यम वर्ग का कोई फायदा नहीं है। जीएसटी में इतना फेर बदल किया जा रहा है, जिससे पूरा सिस्टम व व्यापार ध्वस्त हो गया है। सरकार विदेशी कंपनियों से सर्वे कराकर वाहवाही लूटने में लगी हुई है, जबकि धरातल पर हकीकत कुछ और ही है।
कर अधिवक्ता सुधीर सिंह ने बताया कि जिन 29 वस्तुओं पर जीएसटी दर कम करने की बात हो रही है। वह उलझने के सिवाय और कुछ भी नहीं है। यह जमीनी तौर पर गरीबों का फायदा होने वाला नहीं है। यह शुद्ध रूप से व्यापारियों और आमजन के साथ धोखा है। व्यापारी विजय कुमार का कहना है कि जीएसटी में बार-बार बदलाव होने से व्यापार व सिस्टम कार्य करने में काफी परेशानी हो रही है। सरकार दर कम करके व्यापारियों को उलझाने का काम कर रही है। व्यापारी सुरेंद्र कुमार ने बताया कि शिक्षण संस्थानों में जीएसटी दर कम कर छात्रों को रियायत दी गई है।
इस बाबत जीएसटी नोडल अधिकारी जयंत कुमार सिंह का कहना है कि जीएसटी दर कमी होने से कुछ वस्तुओं को छोड़ दिया जाय तो अन्य वस्तुओं में निश्चित रूप से गरीब व मध्यम वर्ग के लोगों को लाभ होगा।