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लोगों को धर्म नहीं लड़ाता

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आईएएस, आपीएस, इंजीनियरिंग, डॉक्टर, सीए एवं अन्य कोई भी पढ़ाई पढ़े, लेकिन अपने-अपने धर्म की किताबें अवश्य पढ़े। देश में पाश्चात्य सभ्यता हावी नहीं हो रही है, बल्कि हम अपना धर्म छोड़ रहे हैं। इसलिए वर्तमान परिवेश में हम पारिवारिक, आर्थिक व मानसिक रूप से परेशान रह रहे है और जघन्य से जघन्य अपराध कर बैठ रहे हैं। यह बातें पं. श्रीकांत शर्मा ने शुक्रवार को अग्रवाल धर्मशाला में पत्रकारों के समक्ष कहीं।
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श्री शर्मा ने कहा कि लोगों को धर्म नहीं लड़ता है, बल्कि स्वार्थ लड़ाता है। देश को अनपढ़ नुकसान नहीं पहुंचा रहे हैं, बल्कि आधा-अधूरा पढ़े लोग नुकसान पहुंचा रहे हैं। कहा कि आधा-अधूरा पढ़े लोग ही शास्त्र से लेकर शास्त्रार्थ तक की बुराई करते है। पढ़े-लिखे लोग कभी नहीं करते है। इसी प्रकार लोगों का पतन सोना, चांदी व धन नहीं करता, बल्कि उनका चरित्र पतन करता है। आज के परिवेश में साधु-संत से लेकर राजनीतिक लोगों का चरित्र पतन देखने को मिल रहा है। यह काफी चिंतनीय विषय है। कहा कि जिस घर या दरवाजे पर गाय का गोबर व मूत्र गिरता है, वहां के लोग चरित्रवान व विद्वान पैदा होते है। क्योंकि मूत्र में सरस्वती और गोबर में लक्ष्मी का वास होता है। कहा कि 45 वर्षो से श्रीमद् भागवत कथा कर रहा हूं।
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