बिजली विभाग में अधिकारियों एवं ठेकेदारों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाए जाने के एक मामले में आरोपी अधिकारी को ही जांच कमेटी का प्रमुख बनाए जाने का मामला प्रकाश में आया है। बिजली कनेक्शन देने में विभाग के अफसरों एवं ठेकेदारों की कारगुजारी से परेशान शिवपुर दीयर नई बस्ती निवासी एक महिला ने इसकी जांच कराने की शिकायत शासन से की थी। उसके द्वारा आरटीआई से विभिन्न बिंदुओं पर मांगी गई सूचना पर भी अधिकारी उदासीन रहे। इस मामले में ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा के निर्देश पर एक जांच कमेटी तो गठित कर दी गई। लेकिन जांच कमेटी में भी ऐसे अधिकारी को रख दिया गया, जिसे पीड़िता ने आरोपी बनाया है। पीड़िता ने पीएम तथा सीएम के साथ ही विभाग के मंत्री को पत्र लिखा है।
शिवपुर दीयर नईबस्ती बयासी निवासी रजनी पांडेय पत्नी आशीष पांडेय ने पीएम तथा सूबे के सीएम को लिखे गए पत्र में उल्लेख किया है कि विभागीय अफसरों और दबंग ठेकेदारों के चलते उसके आवेदन दिए जाने के बाद भी उसे बिजली का कनेक्शन नहीं दिया गया। उसने हाईकोर्ट में अपनी याचिका दाखिल की। जिसपर न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और दयाशंकर त्रिपाठी की बेंच ने तत्काल बिजली कनेक्शन देने का आदेश 17 जनवरी 2017 को दिया था। लेकिन आदेश के बावजूद अब तक कनेक्शन नहीं दिया गया। प्रकरण की शिकायत के बाद विधायक ने दबाव बनाया तो 30 दिसंबर 2017 को कनेक्शन तो दे दिया गया। जबकि विभागीय भ्रष्टाचार के प्रकरण में आज तक सूचना अधिकार के तहत मांगी गई सूचनाएं उपलब्ध नहीं कराई गई। इस प्रकरण में पूर्वांचल विद्युत वितरण के प्रबंध निदेशक से भी सूचनाएं मांगी गई थी, जिसे न देने पर उसकी अपील प्रमुख सचिव ऊर्जा के यहां की गई। यहां भी पीड़िता को सूचनाएं नहीं दी गई। जिसके बाद ऊर्जा मंत्री के आदेश पर कमेटी गठित कर दी गई। लेकिन कमेटी का प्रमुुख प्रबंध निदेशक को ही बना दिया गया। इस पर पीड़िता ने 19 मार्च को पीएम, सीएम, ऊर्जा मंत्री, प्रमुख सचिव व डीएम को पत्र भेजकर निष्पक्ष जांच की मांग की है।
कोट
प्रकरण के बारे में उन्हें अब तक जानकारी नहीं दी गई। अगर जांच के लिए कमेटी बनाई गई है तो जांच आने के बाद ही कार्रवाई की जाएगी। शासन के निर्देश पर कमेटी के गठन पर कुछ नहीं बता सकते है।
एसके श्रीवास्तव, अधीक्षण अभियंता